दुर्गम पहाड़ियों में आस्था का केंद्र ‘निरई माता मंदिर’ में उमड़ा जनसैलाब
मार्ग, शेड और मूलभूत सुविधाओं के विकास पर प्रशासन का फोकस, इको-टूरिज्म के रूप में होगा विकास
उत्तम साहू धमतरी, 23 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम मोहेरा में विराजित प्रसिद्ध निरई माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर में आयोजित “माता जात्रा” के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
मंदिर की खासियत यह है कि यहां माता की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। श्रद्धालु प्राकृतिक रूप से बनी पत्थर की गुफा में निराकार रूप में माता की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्तजन भेंट-प्रसाद अर्पित करते हैं।
इस वर्ष धमतरी, गरियाबंद, रायपुर, बालोद सहित आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य ओडिशा से लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर तक पहुंच मार्ग का निर्माण, अतिरिक्त शेड, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि निरई माता क्षेत्र को आस्था के साथ-साथ इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
कलेक्टर ने हाल ही में ग्राम मोहेरा का दौरा कर स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुदृढ़ की जाएं, ताकि भविष्य में आयोजन और अधिक व्यवस्थित हो सके।
चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर कलेक्टर स्वयं मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से संवाद कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
यहां की एक विशेष परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना केवल पुरुषों द्वारा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महिलाओं का मंदिर में प्रवेश एवं प्रसाद ग्रहण करना निषिद्ध है, जिसका श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा के साथ पालन करते हैं।
प्रशासन द्वारा इस वर्ष किए गए व्यापक इंतजामों के चलते श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का लाभ मिला। भविष्य में भी इस पवित्र स्थल के विकास और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

