काम के बदले ज़मीन ‘गिफ्ट’ की आड़ में कथित डील से नगरी में हलचल, सिस्टम की नीयत पर उठे सवाल

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काम के बदले ज़मीन ‘गिफ्ट’ की आड़ में कथित डील से नगरी में हलचल, सिस्टम की नीयत पर उठे सवाल



                उत्तम साहू,नगरी/धमतरी।
धमतरी जिले के नगरी इलाके में एक कथित ज़मीन सौदे ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मामला साधारण रजिस्ट्री का नहीं, बल्कि उस “गिफ्ट” का है जिस पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरकारी काम के बदले ज़मीन का खेल रचा गया और उसे वैध दिखाने के लिए ‘उपहार’ का रास्ता अपनाया गया।

    सीधे नहीं, रिश्तेदार के नाम ज़मीन

सूत्रों के अनुसार, ज़मीन की रजिस्ट्री किसी अधिकारी के नाम सीधे नहीं की गई, बल्कि उनके बेहद करीबी रिश्तेदार के नाम पर कराई गई। यही तथ्य अब पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।
बताया जा रहा है कि यह कथित सौदा उस समय हुआ जब संबंधित सरकारी काम प्रक्रिया में था, जिससे पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं।

   कागज़ों में ‘गिफ्ट’, मगर कहानी कुछ और?

दस्तावेज़ों में इस रजिस्ट्री को “गिफ्ट डीड” बताया गया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि कई बार ऐसे मामलों में ‘गिफ्ट’ का इस्तेमाल असल लेन-देन को छिपाने के लिए किया जाता है।
यही वजह है कि अब इस सौदे की नीयत और पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है।

         EOW तक पहुंच सकती है शिकायत

सूत्र बताते हैं कि मामले की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो पूरे सौदे की परतें खुल सकती हैं—कौन, कब और किस भूमिका में था, इसकी जांच की जा सकती है।

         प्रशासनिक गलियारों में बेचैनी

जैसे ही संभावित जांच की चर्चा शुरू हुई, प्रशासनिक हलकों में बेचैनी बढ़ गई है। कई लोग इसे “गिफ्ट के नाम पर सेटिंग” का मामला बता रहे हैं, तो कुछ इसे महज़ एक पारिवारिक लेन-देन कहकर खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं।

          अब सवाल सीधे सिस्टम पर

यह मामला सिर्फ एक ज़मीन रजिस्ट्री का नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि,क्या सरकारी काम के बदले ‘गिफ्ट’ का खेल हुआ? क्या रिश्तेदार के नाम रजिस्ट्री कराकर नियमों को दरकिनार किया गया? और सबसे बड़ा सवाल, क्या जांच में सिस्टम के भीतर छिपे रिश्तों और सौदों का सच सामने आएगा?

फिलहाल आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर शिकायत EOW तक पहुंचती है, तो नगरी की इस कथित “गिफ्ट डील” की कहानी प्रशासनिक तंत्र के कई पन्ने खोल सकती है।

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