बिलासपुर में कर्मचारियों पर आरोपों की बौछार, संघ ने खोला मोर्चा
बिना सबूत कार्रवाई नहीं: कर्मचारी संगठनों का प्रशासन को साफ संदेश — रोहित तिवारी
ज्ञान शंकर तिवारी
बिलासपुर। शासकीय कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा इन दिनों Bilaspur में चर्चा का विषय बन गया है। लगातार लग रहे आरोपों और शिकायतों के बीच कर्मचारी संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को साफ संदेश दिया है कि बिना ठोस प्रमाण किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से अंकित गौरहा द्वारा शासकीय कर्मचारियों पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायत और जांच की प्रक्रिया के कारण कई कर्मचारियों को मानसिक दबाव और भय का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला सुनील यादव का सामने आया है, जो प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री हैं।
इस मामले में पहले जिला स्तर पर गठित चार सदस्यीय समिति ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें सुनील यादव पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया गया था। इसके बावजूद दोबारा जांच का दबाव बनाया गया और नई समिति गठित कर दी गई। इतना ही नहीं, इस मामले को शासन स्तर तक ले जाकर लगातार पत्राचार और प्रचार भी किया जा रहा है।
कर्मचारी संघ के पदाधिकारी रोहित तिवारी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला समझ से परे है और इसमें सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि बिना सत्यता के बार-बार शिकायत करना कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान करने जैसा है।
इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए कर्मचारी संगठनों ने कलेक्टर Bilaspur के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि झूठी शिकायतों पर रोक लगाई जाए और इस प्रकार की शिकायतें करने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी भी दी है कि यदि कर्मचारियों को इस तरह निशाना बनाना बंद नहीं किया गया, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।

