प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे की उलटी गिनती: बस्तर में डीजीपी की हाई लेवल मीटिंग, आखिरी प्रहार की रणनीति पर मंथन
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की तय समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सुरक्षा तंत्र की सक्रियता और तेज हो गई है। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए बस्तर संभाग में अंतिम और निर्णायक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के डीजीपी अरुणदेव गौतम ने दंतेवाड़ा पहुंचकर बस्तर रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।
करीब दो घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में आगामी हफ्तों के लिए रणनीतिक दिशा तय करने पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, अंदरूनी इलाकों में सक्रिय बचे नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरेंडर नीति को प्रभावी बनाने और जरूरत पड़ने पर टारगेटेड ऑपरेशन चलाने की रणनीति पर विशेष मंथन हुआ।
बैठक में जिला पुलिस और सीआरपीएफ के बीच रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को और मजबूत करने, नए सुरक्षा कैंप स्थापित कर नक्सलियों की सप्लाई लाइन पूरी तरह काटने तथा मानसून से पहले बड़े और समन्वित ऑपरेशनों की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत कैंप विस्तार और विकास कार्यों को सुरक्षा कवच के साथ आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस समय सीमा को ध्यान में रखते हुए बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव जिलों के पुलिस अधीक्षक इस रणनीतिक बैठक में शामिल हुए।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां और तेज होंगी तथा समन्वित कार्रवाई के जरिए नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण की शुरुआत होगी।

