किसके दबाव में सिमट रही सरकारी जमीन?” – मगरलोड नगर पंचायत में बाउंड्री वॉल निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

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 “किसके दबाव में सिमट रही सरकारी जमीन?” – मगरलोड नगर पंचायत में बाउंड्री वॉल निर्माण पर उठे गंभीर सवाल



               मगरलोड से उत्तम साहू की रिपोर्ट 

मगरलोड26 मार्च 2026 नगर पंचायत मगरलोड इन दिनों एक ऐसे निर्माण कार्य को लेकर चर्चा के केंद्र में है, जिसने पारदर्शिता और प्रशासनिक नीयत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौठान के पास बन रही पानी टंकी के आहता (बाउंड्री वॉल) का मामला अब सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि “सरकारी जमीन छोड़ने की मंशा” को लेकर बड़ा विवाद बनता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस आहता निर्माण के लिए करीब 330 फीट का स्पष्ट लेआउट पहले ही तय किया गया था। लेआउट के मुताबिक चारों ओर कलम गड्ढों की खुदाई भी कर दी गई थी, जिससे यह साफ था कि पूरी सरकारी जमीन को घेरते हुए बाउंड्री वॉल बनाई जानी है। लेकिन अब अचानक तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

              लेआउट बदला या इरादा?



स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब बाउंड्री वॉल को कम एरिया में समेटने की तैयारी चल रही है। पहले जहां कलम गड्ढे खोदे गए थे, वहां से हटाकर दूसरी जगह निर्माण की कोशिश हो रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके इशारे पर यह बदलाव किया जा रहा है?

“धन्ना सेठ” के लिए जगह छोड़ने की चर्चा
नगर में यह चर्चा जोरों पर है कि किसी रसूखदार व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए लगभग 200 फीट सरकारी जमीन छोड़ने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर कोई विवाद नहीं है, उसी को जानबूझकर छोड़ा जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों की आपत्ति, पर कार्रवाई नदारद
वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद चेतन बिनझेकर सहित कई जागरूक जनप्रतिनिधियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और स्पष्ट कहा है कि बाउंड्री वॉल पूरी जमीन को कवर करते हुए बनाई जानी चाहिए। शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन आरोप है कि न तो सीएमओ, न ही उप अभियंता और न ही ठेकेदार इस पर गंभीरता दिखा रहे हैं।

पुराने निर्माण को भी हटाने की तैयारी?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वहां पहले से मौजूद सामान रखने के कमरे को भी नजरअंदाज कर दूसरे के लिए जगह छोड़ने की कवायद की जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

सबसे बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
अब नगर में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है—
क्या यह फैसला सीएमओ के स्तर पर लिया जा रहा है?
क्या इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध है?
या फिर ठेकेदार अपने फायदे के लिए खेल कर रहा है?

या फिर इन सबके पीछे कोई ऐसा दबाव है, जिसका खुलासा होना अभी बाकी है?

नगर की नजरें प्रशासन पर टिकीं
फिलहाल, मामला गरम है और लोगों की निगाहें नगर पंचायत प्रशासन पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद अधिकारी पूरे लेआउट के अनुसार बाउंड्री वॉल बनवाते हैं या फिर “खामोशी में समझौते” का यह खेल आगे भी जारी रहता है।

मगरलोड की जनता जवाब चाहती है,सरकारी जमीन आखिर किसके लिए छोड़ी जा रही है?

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