दो माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं: बोराई पुलिस की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल

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दो माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं: बोराई पुलिस की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल



                     उत्तम साहू 27 मार्च 2026

नगरी-धमतरी। बोराई थाना में दर्ज गंभीर आर्थिक अपराध के मामले में दो माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एक भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना अब पुलिस की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। मंडी कर अपवंचन जैसे संगीन मामले में जिला प्रशासन की सख्ती के बाद दर्ज एफआईआर अब ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है, जिससे आमजन के बीच भी असंतोष पनपने लगा है।

मामला नगरी कृषि उपज मंडी क्षेत्र का है, जहां प्रशासन ने 22 जनवरी 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए घुटकेल स्थित थोक धान व्यापारी शिवम ट्रेडर्स को सीलबंद किया था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर फर्म संचालक संतोष खंडेलवाल समेत दो अन्य के खिलाफ बोराई थाना में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 339 और 340 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

जांच में सामने आई गंभीर गड़बड़ियां

अनुविभागीय दंडाधिकारी नगरी के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय जांच दल ने 11 जनवरी को फर्म का निरीक्षण किया था। 14 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए थे।

  • ई-मंडी/एग्री पोर्टल के अनुज्ञा पत्रों और स्टॉक पंजी में भारी अंतर
  • पीडीएफ दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ कर धान की मात्रा बढ़ाकर दिखाना
  • बिना वैध अनुज्ञा पत्र के परिवहन
  • चेक पोस्ट पर संशोधित दस्तावेज प्रस्तुत करना

जांच में यह भी पाया गया कि 47 अनुज्ञा पत्रों में हेरफेर कर करीब 5656 क्विंटल धान का अवैध परिवहन किया गया, जिससे लगभग 2.48 लाख रुपये के मंडी कर की चोरी की आशंका है।

      पुलिस का जवाब—‘आरोपी फरार’

जब इस मामले में बोराई थाना प्रभारी से जानकारी ली गई, तो उनका कहना था कि आरोपी फरार हैं और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश की जा रही है।

        सूत्रों के दावे ने बढ़ाई शंका

हालांकि, सूत्रों का दावा इससे बिल्कुल उलट है। सूत्रों के अनुसार, तीनों आरोपियों को कथित तौर पर स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

        सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई कब?

यहां सबसे अहम सवाल यही है कि जब मामला स्पष्ट जांच और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर दर्ज हुआ है, तो आखिर गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों? क्या पुलिस की जांच वाकई कमजोर है? या फिर जानबूझकर कार्रवाई को टाला जा रहा है? अगर आरोपी फरार हैं, तो दो महीने में उन्हें पकड़ने की ठोस रणनीति क्यों नहीं बनी?

       प्रशासन की सख्ती बनाम पुलिस की ढिलाई

एक ओर जिला प्रशासन ने पारदर्शिता और राजस्व सुरक्षा को लेकर सख्ती दिखाई, वहीं दूसरी ओर पुलिस की धीमी कार्रवाई पूरे प्रयास पर सवाल खड़े कर रही है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि बड़े आर्थिक अपराधों में भी आरोपी आसानी से कानून की पकड़ से बच सकते हैं।

            जनता का भरोसा दांव पर

इस मामले ने आम लोगों के मन में कानून व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। यदि समय रहते गिरफ्तारी नहीं होती, तो यह न सिर्फ प्रशासन की साख को प्रभावित करेगा बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी गहरे सवाल छोड़ जाएगा।

अब देखना होगा कि बोराई पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई कर अपनी कार्यशैली पर उठ रहे सवालों का जवाब देती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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