दिव्यांगता नहीं बनी बाधा: सायरा बानो ने ई-रिक्शा की स्टीयरिंग थामकर लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर धमतरी की सायरा बानो बनीं प्रेरणा, रोज़ाना 300–500 रुपये की कर रही आय
उत्तम साहू धमतरी, 7 मार्च 2026।
कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं। धमतरी जिले की सायरा बानो ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। शारीरिक दिव्यांगता और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। उनकी यह सफलता की कहानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
एक समय ऐसा था जब सायरा बानो के सामने रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती बन गया था। रोजगार के अभाव और आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनका जीवन संघर्ष से भरा हुआ था। लेकिन उन्होंने हालात से समझौता करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लिया और जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई।
सायरा बानो के जज़्बे को देखते हुए कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने उनकी मदद के लिए पहल की। उन्हें बड़ौदा आरसेटी धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान सायरा बानो ने पूरे समर्पण के साथ वाहन चलाने की तकनीक सीखी। साथ ही स्वरोज़गार से जुड़ी जानकारी और पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के तहत उन्हें ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। आज सायरा बानो धमतरी शहर की सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। इस काम से उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय हो रही है।
कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि लाभार्थी संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
सायरा बानो की यह कहानी केवल एक महिला की सफलता की दास्तान नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदल सकता है।

