रिश्वत मांगने वाला शिक्षा विभाग के क्लर्क दोषी, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा
अंबिकापुर में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में आखिरकार अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। सेवानिवृत्त प्रधान पाठक के रिटायरमेंट फंड के भुगतान के बदले रिश्वत मांगने वाले क्लर्क को अब तीन साल जेल की सजा भुगतनी होगी।
दरअसल, सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड में पदस्थ क्लर्क प्रमोद गुप्ता पर आरोप था कि उसने सेवानिवृत्त शिक्षक बरनाबस मिंज से उनके लंबित भुगतान—अवकाश नगदीकरण और सातवें वेतनमान के एरियर्स—जारी करने के लिए मोटी रकम की मांग की थी। शिकायतकर्ता को रिटायरमेंट के बाद केवल ग्रेच्युटी की राशि मिली थी, जबकि करीब 7 लाख रुपये अब भी अटके हुए थे।
मामला तब गंभीर हुआ जब आरोपी ने बिल बनाने और राशि कोषालय तक पहुंचाने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 80 हजार रुपये की मांग रख दी। परेशान होकर सेवानिवृत्त शिक्षक ने एसीबी से संपर्क किया। सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाया और 30 दिसंबर 2020 को क्लर्क को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
जांच पूरी होने के बाद मामला विशेष अदालत पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद 9 अप्रैल को फैसला सुनाया गया। अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए तीन साल के कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
यह फैसला साफ संदेश देता है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगना अब महंगा पड़ सकता है—कानून की पकड़ देर से सही, लेकिन मजबूत जरूर होती है।

