धमतरी वन मंडल के नगरी में खुलेआम आम भ्रष्टाचार का खेल, मुख्यमंत्री का 'सुशासन' दांव पर!

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धमतरी वन मंडल के नगरी में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल, मुख्यमंत्री का 'सुशासन' दांव पर..


उत्तम साहू 

धमतरी/नगरी-  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को धता बताते हुए धमतरी वन मंडल के नगरी उपमंडल में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। आरोप है कि यहाँ तैनात एक अनुविभागीय अधिकारी (SDO) ने सरकारी खजाने को निजी जागीर समझ लिया है। करोड़ों के स्टॉप डैम से लेकर कार्यालय मरम्मत तक, हर जगह 'कमीशन' और 'फर्जीवाड़े' का खेल जारी है।

भ्रष्टाचार के प्रमुख केंद्र: कहाँ-कहाँ लगी सेंध?

नगरी वन मंडल में भ्रष्टाचार की फेहरिस्त लंबी है। प्राप्त जानकारी और शिकायतों के आधार पर प्रमुख घोटाले इस प्रकार हैं:

 करोड़ों का स्टॉप डैम घोटाला: वन्यजीवों के संरक्षण के नाम पर जंगलों में बनाए गए स्टॉप डैम अब लूट का पर्याय बन चुके हैं। बिना गुणवत्ता के निर्माण और कागजों पर विकास दिखाकर करोड़ों की राशि ठिकाने लगाने का आरोप है।

 सांकरा कार्यालय की 'कागजी' मरम्मत: सांकरा में नए भवन के लिए टेंडर और प्रशासकीय स्वीकृति होने के बावजूद, पुराने भवन की मरम्मत के नाम पर लाखों के फर्जी बिल पास कराए गए। नए गेट और खिड़कियां लगाने के बहाने सरकारी पैसे का जमकर बंदरबांट हुआ।

 मुरूम सड़क निर्माण में रहस्य: निर्राबेडा से घोरागांव के बीच पुलिया के पास मुरूम बिछाने का कार्य किया गया। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय वन परिक्षेत्राधिकारी (RFO) को इस कार्य की कोई जानकारी ही नहीं है। बिना जानकारी के हो रहे ये कार्य सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।

निजी ऐश-ओ-आराम पर सरकारी खर्च

सूत्रों का दावा है कि उक्त एसडीओ अपनी निजी गाड़ियों में ईंधन भरवाने के लिए सरकारी नंबरों का उपयोग कर फर्जी बिल लगवा रहे हैं। शासकीय राशि का व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग करना यहाँ की कार्यशैली बन चुका है।

तानाशाही और पत्रकारों से बदसलूकी

जब जिम्मेदार पत्रकार इन कार्यों में पारदर्शिता को लेकर सवाल पूछते हैं, तो अधिकारी द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। कार्यालय से नदारद रहना और मातहत कर्मचारियों को डरा-धमकाकर फर्जी वाउचरों पर हस्ताक्षर करवाना एसडीओ की कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि"अगर सरकार पिछले तीन वर्षों में हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराए, तो यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वन घोटालों में से एक साबित होगा।" 

सिस्टम फेल या मिलीभगत?

लगातार हो रही शिकायतों के बाद भी उच्च अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या भ्रष्टाचार का यह 'प्रसाद' ऊपर तक पहुँच रहा है? क्या इसीलिए जाँच की फाइलें दबा दी जाती हैं?

जनता का सवाल:

मुख्यमंत्री साय की सुशासन वाली छवि को जमीनी स्तर पर ये भ्रष्ट अधिकारी धूमिल कर रहे हैं। जनता अब यह पूछ रही है कि क्या 'कवर' देने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी या नगरी वन मंडल में लूट का यह सिलसिला यूं ही बेखौफ जारी रहेगा?


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