शीतला समिति सिहावा की ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा: आस्था, एकता और सांस्कृतिक समरसता का अनूठा संगम
जगन्नाथ पुरी सहित कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का भ्रमण
उत्तम साहू
नगरी। धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब शीतला समिति सिहावा द्वारा ओडिशा के पवित्र धाम जगन्नाथ मंदिर की भव्य और सुव्यवस्थित तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक यात्रा में समिति के लगभग 90 सदस्य—महिलाएं, बुजुर्ग और युवा श्रद्धालु—शामिल हुए। पूरे सफर के दौरान श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का वातावरण बना रहा।
यात्रा का शुभारंभ सिहावा स्थित शीतला मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समिति के संरक्षक नरेन्द्र नाग एवं ग्राम पटेल राजेश यदु ने हरि झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। रवाना होते ही बसों में भजन-कीर्तन, धार्मिक गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा, जिसने यात्रियों के उत्साह को और बढ़ा दिया।
समिति द्वारा यात्रा की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भोजन, पेयजल, ठहरने, चिकित्सा और सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए गए थे। अनुशासन और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यात्रा पूरी तरह सुचारू रही।
पुरी पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि व शांति की कामना की। भीड़ के बीच भी श्रद्धालुओं ने संयम और अनुशासन का परिचय दिया।
इसके बाद यात्रियों ने गुंडिचा मंदिर, लोकनाथ मंदिर तथा कोणार्क सूर्य मंदिर का दर्शन किया। साथ ही समुद्र तट पर पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। कई श्रद्धालुओं के लिए यह पहला समुद्र दर्शन था, जिसे उन्होंने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
वापसी के दौरान यात्रियों ने लिंगराज मंदिर में भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर की प्राचीनता और भव्य स्थापत्य कला ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा समलेश्वरी मंदिर में माता के दर्शन, हीराकुंड बांध का अवलोकन और नरसिंहनाथ मंदिर का भ्रमण भी किया गया। अंत में बागबाहरा के घुचापाली स्थित चंडी मंदिर में संध्या आरती में शामिल होकर यात्रा का समापन हुआ।
समिति के उपाध्यक्ष रामलाल नेताम, महासचिव नारद निषाद, सचिव बुधेश्वर साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल तीर्थ दर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में भाईचारा, सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना भी था। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
पूरी यात्रा के दौरान स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। समिति ने श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण और साफ-सफाई के प्रति जागरूक भी किया, जिससे अन्य यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच सकारात्मक संदेश गया।
सकुशल वापसी के बाद सभी श्रद्धालुओं ने शीतला मंदिर में हवन-पूजन कर यात्रा का समापन किया और अपने-अपने घरों को रवाना हुए। इस अवसर पर राजकुमार निषाद, भरत निर्मलकर, सुनील सिंहसार, महेश साहू, खेमिन यादव, दीनदयाल गंधर्व, देवंतीन श्रीमाली और कमलेश यदु सहित कई यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। अधिकांश श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन की सबसे यादगार और आध्यात्मिक यात्रा बताया।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने समिति के इस सराहनीय प्रयास की सराहना की। सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा जताई।
इस प्रकार, शीतला समिति सिहावा की यह यात्रा केवल तीर्थाटन ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी।






