नगरी की रफ्तार थमी, नगर में फोरलेन की मांग हुई तेज

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नगरी की रफ्तार थमी, नगर में फोरलेन की मांग हुई तेज

बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच समाधान की राह देखता शहर


उत्तम साहू 

नगरीछोटे शहर की सड़कों पर जब बड़े शहर जैसा ट्रैफिक उतर आए, तो मुश्किलें भी उसी अनुपात में बढ़ जाती हैं। नगर पंचायत नगरी इन दिनों कुछ ऐसी ही चुनौती से जूझ रहा है। बजरंग चौक से पुराने पेट्रोल पंप होते हुए हरदीभाठा चौक तक का मुख्य मार्ग अब अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा बोझ ढो रहा है, जिससे दिनभर जाम और अव्यवस्था आम बात हो गई है।

यही कारण है कि अब नगरी में फोरलेन सड़क की मांग सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मजबूरी बनती जा रही है। स्थानीय नागरिकों की लंबे समय से उठ रही इस मांग को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) नगरी ने करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर छत्तीसगढ़ शासन को भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव को वर्ष 2026 के मूल बजट में उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा शामिल भी किया गया है। अब सबकी निगाहें इसकी प्रशासनिक स्वीकृति पर टिकी हैं।

दरअसल, यह मार्ग नगरी की जीवनरेखा माना जाता है। इसी रास्ते पर प्रमुख बैंक, तहसील कार्यालय, शासकीय अस्पताल, जनपद पंचायत, शिक्षा विभाग के दफ्तर और रावणभाठा जैसे महत्वपूर्ण स्थल स्थित हैं। रोजाना यहां सैकड़ों ग्रामीण और किसान अपने कामकाज के लिए पहुंचते हैं, जिससे यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

हालात तब और बिगड़ जाते हैं, जब शहर में कोई बड़ा आयोजन या रैली होती है। हाल ही में बजरंग चौक पर एक ट्रक के गलत दिशा में मुड़ने से सैकड़ों वाहनों की लंबी कतार लग गई थी, जिसमें स्कूली बच्चे, कर्मचारी और आम नागरिक घंटों फंसे रहे। यह घटना नगरी की ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत को बयां करने के लिए काफी है।

इसके अलावा सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग और लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या दुर्घटनाओं के खतरे को भी बढ़ा रही है। ऐसे में फोरलेन सड़क का निर्माण अब शहर के सुनियोजित विकास और सुरक्षित यातायात के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।

नगरी वासी अब प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को जल्द हरी झंडी मिलेगी।

अब सवाल यही है, क्या नगरी को जाम से मुक्ति दिलाने वाली यह योजना कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेगी, या फिर शहर यूं ही ट्रैफिक के जंजाल में उलझा रहेगा?

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