भारत माला में मुआवजे का खेल? पूर्व मंत्री के करीबी रडार पर, ED–EOW की बड़ी दबिश से मचा सियासी हलचल
रायपुर, 27 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर जांच एजेंसियों की सख्त दस्तक ने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण में कथित मुआवजा घोटाले की परतें खोलने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री के करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की।
सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई का केंद्र बने भूपेंद्र चंद्राकर—जो पूर्व मंत्री के चचेरे भाई बताए जा रहे हैं। उनके निवास के साथ-साथ पूर्व राइस मिल अध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर भी एजेंसियों ने दस्तावेज खंगाले। शुरुआती जांच में जमीन अधिग्रहण के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और नियमों को दरकिनार कर मुआवजा बांटने के संकेत मिले हैं।
बताया जा रहा है कि अभनपुर क्षेत्र के कायाबांधा में ही करोड़ों रुपये का मुआवजा संदिग्ध परिस्थितियों में जारी हुआ। इतना ही नहीं, दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड जैसे इलाकों में भी इसी तरह के पैटर्न की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि प्रभाव और पहुंच का इस्तेमाल कर चुनिंदा लोगों को भारी-भरकम मुआवजा दिलवाया गया।
जांच एजेंसियों के पास पहुंचे दस्तावेजों में कई ऐसे लेन-देन का जिक्र है, जो संदेह के घेरे में हैं। यही वजह है कि अब सिर्फ कागजों की जांच नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय नेटवर्क को खंगालने की तैयारी चल रही है—ताकि यह साफ हो सके कि इस कथित घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और किन-किन स्तरों तक फैली हुई हैं।
इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल, ED और EOW की टीमें जुटी हुई हैं—और नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगला नाम किसका सामने आता है।

