बोराई सिविल अस्पताल की बदहाली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, धरने के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

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बोराई सिविल अस्पताल की बदहाली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, धरने के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

अस्पताल में एक आरएमए और नर्सिंग ऑफिसर की नियुक्ति, पुलिस बल की मौजूदगी में हुई बैठक



उत्तम साहू 

नगरी। वनांचल क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का सपना दिखाने वाला बोराई सिविल अस्पताल अब खुद बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन गया है। पांच वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्रामीण अंचल को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बोराई स्वास्थ्य केंद्र को 18 पदों के साथ सिविल अस्पताल में उन्नत किया था। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि अस्पताल में न तो नियमित डॉक्टर हैं और न ही 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं।

रविवार रात लिखमा निवासी दुलार सिंह सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। परिजन उन्हें इलाज के लिए रात करीब 11 बजे बोराई सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। न डॉक्टर मौजूद थे और न कोई स्वास्थ्य कर्मचारी। गंभीर हालत में घायल मरीज को अस्पताल के बाहर तड़पता देख ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा और रात में ही ग्रामीण अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। अधिकारियों द्वारा सुबह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के गांव पहुंचकर समस्या का समाधान करने का आश्वासन देने के बाद देर रात धरना समाप्त हुआ। घायल दुलार सिंह को बाद में इलाज के लिए नगरी अस्पताल भेजा गया।

बोर्ड सिविल अस्पताल का, सुविधाएं पीएचसी से भी बदतर

ग्रामीणों का आरोप है कि बोराई सिविल अस्पताल में 18 स्वीकृत पद होने के बावजूद एक भी स्थायी मेडिकल ऑफिसर पदस्थ नहीं है। पदस्थ डॉक्टर पीजी कोर्स के लिए जा चुकी हैं। अस्पताल फिलहाल एक आरएमए और सीमित स्टाफ के भरोसे संचालित हो रहा है। दिन के समय अलग-अलग स्थानों से डॉक्टर बुलाकर व्यवस्था चलाई जा रही है।

ग्रामीण सोनराज वट्टी, माखन लाल सलाम, खुमान सिंह, वीरेन्द्र यादव, जुगलकिशोर, लखन मरकाम, चंद्रप्रकाश नेताम और लिलेश्वर नेताम ने बताया कि अस्पताल में रात के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं रहता। दिन में भी रोजाना बदल-बदलकर डॉक्टर आने से मरीजों को भारी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांकरा में एक मेडिकल ऑफिसर और तीन आरएमए पदस्थ हैं, जबकि सिविल अस्पताल बोराई में पांच वर्षों से मेडिकल ऑफिसर का पद खाली पड़ा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले क्षेत्र के नक्सल प्रभावित होने का हवाला दिया जाता था, लेकिन अब पूरा जिला नक्सलमुक्त घोषित हो चुका है। इसके बावजूद स्टाफ क्वार्टर और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में डॉक्टर यहां रुकना नहीं चाहते।

धरने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया

ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन और हंगामे के बाद सोमवार को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमला बोराई पहुंचा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कौशिक डीपीएम, बीएमओ, बीपीएम, एसडीओपी, टीआई, तहसीलदार और नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे।

चार पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में अस्पताल परिसर के सामने बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी और वीरेन्द्र यादव ने ग्रामीणों की ओर से स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।

ग्रामीणों के दबाव के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से बोराई सिविल अस्पताल में एक नए आरएमए और एक नर्सिंग ऑफिसर की पदस्थापना के आदेश जारी किए। साथ ही दो स्टाफ नर्सों की जल्द नियुक्ति का लिखित आश्वासन भी दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल की एक स्टाफ नर्स तीन दिन की छुट्टी पर है, जिसके कारण अस्थायी व्यवस्था की गई थी। ग्रामीणों की मांग पर बोराई बाजार के दिन अतिरिक्त डॉक्टर की ड्यूटी लगाने तथा फार्मासिस्ट नहीं होने की स्थिति में नर्सिंग ऑफिसर की मौजूदगी में दवाइयों के वितरण पर भी सहमति बनी।

सीएमएचओ ने अस्पताल स्टाफ को मुख्यालय में ही रहने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

व्यवस्था नहीं सुधरी तो होगा सुशासन तिहार का बहिष्कार

बैठक में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि बोराई सिविल अस्पताल की व्यवस्था स्थायी रूप से नहीं सुधरी तो बोराई, घुटकेल, मैनपुर और लिखमा पंचायत के ग्रामीण आगामी सुशासन तिहार का बहिष्कार करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर वे पहले भी चक्काजाम और आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि एक सड़क हादसे ने यह साबित कर दिया कि क्षेत्र में रात के समय बीमार पड़ना लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है।

हालांकि नए स्टाफ की नियुक्ति से ग्रामीणों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौटी तो आंदोलन और बहिष्कार दोनों किए जाएंगे।

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