नगरी.. सब्जी बाड़ी के मुआवजा पर उठे सवाल, विभाग ने स्पष्ट किया अपना पक्ष
उत्तम साहू
नगरी। क्षेत्र में सोढूंर डैम से सूखे तालाबों को भरने के लिए छोड़े गए पानी को लेकर उत्पन्न विवाद पर सिंचाई विभाग ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित और जनहित में की गई थी, लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही और अवैध हस्तक्षेप के कारण स्थिति बिगड़ी है।
विभाग के अनुसार, गर्मी के मौसम में जल संकट को देखते हुए तालाबों का जलस्तर बढ़ाने के उद्देश्य से पानी छोड़ा गया था। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को पहले ही सूचित कर नालियों के माध्यम से व्यवस्थित रूप से पानी पहुंचाने में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, विभाग का आरोप है कि कुछ किसानों ने नियमों की अनदेखी करते हुए नहर के बंड को काटकर रात के समय चोरी-छिपे अपने खेतों की ओर पानी मोड़ लिया। इस अवैध हस्तक्षेप के चलते पानी का प्रवाह अनियंत्रित हो गया और वह आसपास की सब्जी बाड़ियों में फैल गया,
सिंचाई विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय कर्मचारी दिनभर नहरों की निगरानी करते हैं, लेकिन रात्रिकालीन समय में कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर छेड़छाड़ की जाती है, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है।
मुआवजे की मांग को लेकर भी विभाग ने सवाल उठाए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन फसलों के नुकसान का दावा किया जा रहा है, उनकी वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि मामले में पहले से खराब पड़े कद्दू कुम्हड़ा को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे सरकारी राशि प्राप्त की जा सके।
विभाग ने साफ कहा है कि झूठे दावे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों और अनावश्यक विवादों पर रोक लगाई जा सके।
सिंचाई विभाग ने अपील की है कि किसान नियमों का पालन करें और सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का उपयोग करें, ताकि सभी को समान रूप से लाभ मिल सके।

