मस्ती का सफर बना मौत का रास्ता : पेड़ से टकराई बाइक, एक दोस्त की मौत… दूसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा

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मस्ती का सफर बना मौत का रास्ता : पेड़ से टकराई बाइक, एक दोस्त की मौत… दूसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा

धमतरी से लौट रहे थे तीन दोस्त, एक की आंख में घुसा कीड़ा और उजड़ गई जिंदगी

 


उत्तम साहू 

नगरी। कुछ घंटे पहले तक तीनों दोस्त हंसी-मजाक करते हुए सफर का आनंद ले रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि लौटते वक्त सड़क किनारे खड़ा एक पेड़ उनकी खुशियों को हमेशा के लिए निगल जाएगा। धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया, जबकि दूसरा युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

जानकारी के मुताबिक अमाली नगरी निवासी पेमन ध्रुव, रौशन यादव और उनका मित्र हिथलेश घूमने के लिए धमतरी गए थे। दिनभर घूमने-फिरने के बाद तीनों ने माडमसिल्ली जाने का फैसला किया। वहां से देर शाम अपने गांव लौटते समय गजकन्हार और कल्लेमेटा के बीच यह हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि बाइक पेमन ध्रुव चला रहे थे। अचानक एक कीड़ा उनकी आंख में घुस गया, जिससे कुछ पल के लिए उनकी नजर धुंधली हो गई। तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक सड़क पर गंभीर हालत में जा गिरे।

हादसे की आवाज सुन आसपास के लोग दौड़े और तत्काल डायल 112 को सूचना दी। पुलिस और 112 टीम ने घायलों को सिविल अस्पताल नगरी पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत देखते हुए धमतरी रेफर कर दिया गया।

लेकिन जिला अस्पताल पहुंचते ही पेमन ध्रुव ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं रौशन यादव की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। तीसरा युवक हिथलेश सुरक्षित है, लेकिन हादसे के बाद गहरे सदमे में बताया जा रहा है।

एक और हादसा… फिर वही सवाल

यह दुर्घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। नगरी जैसे बड़े क्षेत्र में सिविल अस्पताल होने के बावजूद गंभीर घायलों को हर बार धमतरी रेफर करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगरी में आधुनिक ट्रॉमा सेंटर और बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा होती, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नगरी क्षेत्र में हाईटेक अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की जाए, ताकि दुर्घटना में घायल लोगों को “रेफर सिस्टम” के भरोसे न छोड़ना पड़े।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सड़क पर एक छोटी सी चूक भी जिंदगी और मौत के बीच की दूरी तय कर देती है।

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