शराब कारोबार में 3,400 करोड़ के कथित घोटाले की जांच तेज, रामगोपाल अग्रवाल 5 अगस्त तक रिमांड पर

0

 

शराब कारोबार में 3,400 करोड़ के कथित घोटाले की जांच तेज, रामगोपाल अग्रवाल 5 अगस्त तक रिमांड पर



रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू)-एसीबी की जांच तेज हो गई है। कोयला लेवी घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाले में भी औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 5 अगस्त तक रिमांड मंजूर की गई है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार में करीब 3,400 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हुआ। एफआईआर में तत्कालीन आबकारी मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों, कारोबारियों समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू इस पूरे मामले में कथित सिंडिकेट, कमीशन वसूली और अवैध धन के लेन-देन की जांच कर रही हैं।

सिंडिकेट बनाकर कमीशन वसूली का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर एक सिंडिकेट बनाकर शराब कारोबार में कमीशन वसूली का नेटवर्क संचालित किया गया। इसमें तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।

कोयला घोटाले के बाद शराब मामले में भी गिरफ्तारी

रामगोपाल अग्रवाल को पहले कथित कोयला लेवी घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईओडब्ल्यू की पुलिस रिमांड के दौरान उन्हें शराब घोटाला मामले में भी औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। अब दोनों मामलों में उनसे समानांतर पूछताछ की जा रही है।

ईओडब्ल्यू का दावा—800 करोड़ रुपये जुटाने में भूमिका

कोल लेवी घोटाला मामले में ईओडब्ल्यू का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल ने कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहते हुए कथित तौर पर करीब 800 करोड़ रुपये के फंड के प्रबंधन और मॉनिटरिंग में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी के अनुसार, रकम बोरे और कार्टून में भरकर कांग्रेस भवन तक पहुंचाई जाती थी और बाद में अलग-अलग माध्यमों से दिल्ली भेजे जाने का आरोप है। एजेंसी इस रकम के उपयोग और कथित चुनावी फंडिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।

डायरी से सामने आया नाम

जांच एजेंसी के अनुसार, कोल लेवी घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ठिकाने पर वर्ष 2022 में हुई कार्रवाई के दौरान मिली एक डायरी में पैसों के लेन-देन से जुड़े विवरण में रामगोपाल अग्रवाल का नाम सामने आया था। इसी आधार पर ईओडब्ल्यू ने उनकी भूमिका की जांच शुरू की।

करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद किया सरेंडर

कोल लेवी घोटाले में नाम सामने आने के बाद रामगोपाल अग्रवाल करीब तीन साल तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे। एजेंसी का दावा है कि इस दौरान वे देश के अलग-अलग हिस्सों में रहे और विदेशों में भी समय बिताया। 8 जुलाई 2026 को उन्होंने ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड मंजूर हुई।

अब शराब और कोयला घोटाला मामलों में उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां कथित वित्तीय लेन-देन, फंड मैनेजमेंट और सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

Post a Comment

0Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !