खाकी पर दाग! दो बाघों की खाल के साथ दबोचे गए तस्कर, पुलिस विभाग से जुड़े होने से मचा हड़कंप
जगदलपुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है। ऑपरेशन "सेफ पैसेज" के तहत संयुक्त कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में दोनों आरोपियों के पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर कार्रवाई करते हुए बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को एक मोटरसाइकिल सहित दो बाघों की खाल के साथ दबोच लिया।
आरोपियों के खिलाफ पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल (जिला कांकेर) में वन अपराध प्रकरण क्रमांक POR-390/09 दर्ज किया गया है।
जांच के दौरान आरोपियों के ठिकाने से पैंगोलिन के शल्क भी बरामद हुए हैं। इससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय वन्यजीव तस्करी के संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि बाघों का शिकार इंद्रावती–अबूझमाड़ के जंगलों में किया गया था। वन विभाग इस कार्रवाई को मध्य भारत के लगभग 400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता मान रहा है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। मामले की गहन जांच की जा रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

