चली गईं पंडवानी की अमर आवाज़: तीजन बाई का निधन, छत्तीसगढ़ की लोकधारा हुई मौन

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चली गईं पंडवानी की अमर आवाज़: तीजन बाई का निधन, छत्तीसगढ़ की लोकधारा हुई मौन



रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पंडवानी की अप्रतिम साधिका, अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में उन्होंने रायपुर के AIIMS में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही लोककला जगत ने अपनी सबसे बुलंद और प्रभावशाली आवाज़ खो दी।

पिछले 38 दिनों से वे AIIMS के आईसीयू में भर्ती थीं और गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद रविवार तड़के लगभग 3:30 बजे उनका निधन हो गया। इस खबर से पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश-विदेश के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

मुख्यमंत्री ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उनका योगदान सदैव अमर रहेगा और पूरा प्रदेश उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

तीजन बाई ने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली, सशक्त अभिनय और ओजपूर्ण गायन से जीवंत बनाया। उनकी कला ने पंडवानी को गांवों की चौपाल से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें , और जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया था।

उनका जाना केवल एक महान कलाकार का निधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की एक अमूल्य धरोहर का खो जाना है। उनकी आवाज़, उनकी कला और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

भावभीनी श्रद्धांजलि। 🕯️

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