जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेले में 20 कलाकारों ने सजाए स्टॉल, बड़े बाजार से जुड़ने की मिली राह
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा—सोशल मीडिया के जरिए अपने हुनर को दुनिया तक पहुंचाएं कारीगर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल आदिवासी कलाकारों और कारीगरों को अपनी कला एवं हुनर प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराएगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, जनजातीय भारत बिक्री केंद्रों, मेलों तथा अन्य विपणन गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर प्राप्त होंगे।
सोशल मीडिया से उत्पादों को मिलेगी नई पहचान
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका से जुड़ा कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकता है। आदिवासी कलाकारों और कारीगरों को मंच उपलब्ध कराकर उनकी कला को रोजगार के अवसरों में बदलना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय इंटरनेट और सोशल मीडिया का है। कारीगर अपने उत्पादों और कला को सोशल मीडिया के माध्यम से बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं। इससे न केवल उनकी कला को व्यापक पहचान मिलेगी, बल्कि आय का नया जरिया भी तैयार होगा।
कलेक्टर ने स्थानीय वन उपज की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ रही है। बेहतर गुणवत्ता, प्रसंस्करण और पैकेजिंग के जरिए जिले के वन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि नगरी क्षेत्र में सतावर बड़ी मात्रा में पाया जाता है और इसकी बाजार में मांग है। इसके अलावा लाख, इमली सहित अन्य वन उपज पर भी व्यवस्थित तरीके से कार्य कर इन्हें आय का बेहतर साधन बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं और आदिवासी समाज के लोगों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
कारीगरों को दिया जाएगा सोशल मीडिया मार्केटिंग का प्रशिक्षण
कलेक्टर ने बताया कि जिले के आदिवासी कारीगरों का एक बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, बाजार प्रबंधन और अन्य आवश्यक कौशल का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, ताकि वे अपने उत्पादों की बेहतर तरीके से ब्रांडिंग और बिक्री कर सकें।
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और कला शैली है। यदि इनके द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार और मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराया जाए तो कारीगरों की आय एवं जीवन स्तर में सुधार के साथ जिले की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है।
विभिन्न उत्पादों ने आकर्षित किया लोगों का ध्यान
मेले में अतिथियों और अधिकारियों ने कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके काम, बाजार की उपलब्धता और आय से संबंधित जानकारी ली। स्टॉलों में वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस एवं बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार एवं उपयोगी सामग्री तथा चित्रकला सहित विभिन्न श्रेणियों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विमल साहू ने कहा कि यह मेला जिले के जनजातीय कारीगरों और उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों से ऐसे अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जीवराखन लाल मरई उप संचालक कृषि मनीष साहू, उप संचालक पंचायत नकुल वर्मा, सहायक संचालक आजीविका संदीप गन्नाडे, उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक प्रशांत चंद्राकर एवं श्री एक्का सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



