भालू का खौफ: दरवाजों पर 7-7 ताले, फिर भी रात में घर से निकलने की हिम्मत नहीं
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| प्रतीकात्मक फोटो |
ग्रामीणों के मुताबिक बीते कुछ दिनों से भालू लगातार रात के समय गांव में पहुंच रहे हैं। खाने की गंध पाकर वे घरों के दरवाजों तक पहुंचते हैं और कमजोर दरवाजों को धक्का देकर तोड़ देते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब एक दर्जन घरों के दरवाजे भालू क्षतिग्रस्त कर चुके हैं।
लकड़ी के बाद अब लोहे के दरवाजे भी निशाने पर
ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में भालू लकड़ी के दरवाजे तोड़कर घरों में घुसने की कोशिश करते थे, लेकिन अब वे लोहे के दरवाजों पर भी जोर आजमाने लगे हैं। सोमवार रात करीब 1:30 बजे एक घर में अचानक दरवाजे के पास तेज आवाज सुनाई दी। बाहर देखने पर परिवार के लोग दंग रह गए—एक भालू लोहे का दरवाजा तोड़कर घर के अंदर घुस चुका था।
भालू को देखते ही परिवार के लोग दूसरे कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर दुबक गए। उन्हें डर था कि कहीं भालू अंदर वाले कमरे का दरवाजा भी न तोड़ दे।
टूटे दरवाजे, सहमी रातें
भालू के आतंक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ ग्रामीण टूटे दरवाजों के कारण रात पड़ोसियों के घर में गुजारने को मजबूर हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रात होते ही सहम जाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार भालू घरों में घुसने के बाद सामान को तहस-नहस कर देते हैं। घरों के बाहर बंधे मवेशियों पर भी हमले की घटनाएं सामने आई हैं।
जंगल में घटता भोजन, गांव की ओर बढ़ता खतरा
ग्रामीणों का मानना है कि जंगलों में लगातार कटाई और प्राकृतिक भोजन-पानी की कमी के कारण भालू अब भोजन की तलाश में गांवों और शहरों की ओर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गांव में गश्त बढ़ाने और भालुओं को आबादी से दूर रखने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
गोविंदपुर में अब रात का मतलब सिर्फ अंधेरा नहीं, बल्कि भालू के अगले दस्तक देने का डर बन चुका है।

