नगरी-सिहावा के वनांचल में विकास का नया रोडमैप, शिक्षा से रोजगार और पर्यटन तक होगा विस्तार
दुगली में मिनी एजुकेशन सिटी की तैयारी, कमार समुदाय के बच्चों की शिक्षा पर जोर; शहद, कोसा, लाख और बांस कला से आजीविका बढ़ाने की पहल
उत्तम साहू,नगरी,धमतरी, 14 अगस्त 2026। वनांचल और आदिवासी बाहुल्य नगरी-सिहावा क्षेत्र में अब विकास को नई दिशा देने की तैयारी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, कौशल विकास, पर्यटन और स्थानीय संसाधनों से रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर विकास कार्यों को गति दी जाएगी। इसी उद्देश्य से कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने विभिन्न वनांचल गांवों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण कुमार सार्वा भी मौजूद रहे।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और जरूरतें जानीं तथा संबंधित विभागों को योजनाओं के माध्यम से कार्य स्वीकृत कर समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
दुगली में विकसित होगी मिनी एजुकेशन सिटी
दुगली में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या परिसर सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने शिक्षा को वनांचल के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने दुगली में मिनी एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य करने की बात कही।
इस पहल से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की योजना है। विद्यालयों में आवश्यक अधोसंरचना, विशेषकर बालिकाओं के लिए सुविधायुक्त शौचालय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कमार जनजाति सहित वनांचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने तथा बालिकाओं को शिक्षा के लिए 30 हजार रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की जाएगी।
ठेनही के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में अधिकारियों ने कक्षा चौथी और पांचवीं के बच्चों से संवाद किया। बच्चों की पढ़ाई और रुचियों की जानकारी लेते हुए उन्हें अपने लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
बांस कला से जुड़ेंगे 50 कमार परिवार
कल्लेमेटा में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के माध्यम से करीब 50 कमार परिवारों को बांस कला से जोड़ने के लिए शेड निर्माण की आवश्यकता पर चर्चा हुई। पारंपरिक हुनर को प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया।
इसी क्षेत्र में ग्राम संगठन भवन और आंगनबाड़ी भवन की जरूरतों की भी जानकारी ली गई। सरईटोला के कला मंच में निर्मित शेड के निरीक्षण के दौरान फ्लोरिंग और टाइल्स संबंधी कार्यों को आवश्यकतानुसार योजनाओं में शामिल करने के निर्देश दिए गए।
सौर ऊर्जा से रोशन गांव, दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ेगी रोशनी
ठेनही में सोलर लाइट से रोशन क्षेत्र का अवलोकन करते हुए कलेक्टर ने ग्रामीणों की पहल की सराहना की। उन्होंने सोलर लाइट वाले क्षेत्र में बाउंड्रीवॉल निर्माण के निर्देश दिए। वनांचल के अन्य गांवों के चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर भी सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था बढ़ाने पर जोर दिया गया।
दूरस्थ गांवों में पेयजल और सड़क पर विशेष फोकस
दौड़, पंडरीपानी, बासीन, गाताभर्री, अर्जुनी और तुमड़ीबहार में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल सुविधा विकसित करने के निर्देश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दिए गए। वहीं वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।
ग्रामीणों की पक्की सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांगों को देखते हुए कलेक्टर ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अधोसंरचना कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
शहद, कोसा और लाख बनेंगे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
वनांचल में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। शहद उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि ग्रामीणों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।
इसके अलावा कोसा और लाख से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियों को आधुनिक बाजार से जोड़ने तथा सांकरा क्षेत्र में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नारियल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
मेचका, सिहावा और फरसिया में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
वनांचल की प्राकृतिक और सांस्कृतिक खूबसूरती को रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेचका को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई तथा पर्यटन की संभावनाओं के आकलन के लिए इंडिया एक्स के सर्वे कराने के निर्देश दिए गए।
सिहावा और फरसिया में भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशी गईं। इससे स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों को होम-स्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से रोजगार मिल सकेगा।
सड़क-पुल और बिजली कनेक्टिविटी होगी मजबूत
सांकरा, घठुला और आरसीकन्हार में अधोसंरचना विकास को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। क्षेत्र के महत्वपूर्ण सीतानदी ब्रिज को शीघ्र स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई गई। पुल बनने से अनेक गांवों का आवागमन आसान होगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बेहतर होगी।
वनांचल में ग्रिड कनेक्टिविटी का विस्तार भी प्रस्तावित है। इससे घरेलू जरूरतों के साथ कृषि, शिक्षा, लघु उद्योग और रोजगार संबंधी गतिविधियों को लाभ मिलेगा। वहीं बोराई में अंतरराष्ट्रीय बस स्टैंड को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है।
वीबी-जी रामजी योजना से स्थानीय जरूरतों के मुताबिक होंगे काम
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वीबी-जी रामजी योजना के तहत ग्रामों की वास्तविक जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कार्यों का चयन किया जाए। ग्रामीणों की मांगों को योजनाओं से जोड़कर अधोसंरचना विकास के साथ रोजगारपरक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाए।
जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण कुमार सार्वा ने कहा कि ग्रामीणों की मांग और प्राथमिकता के अनुसार वीबी-जी रामजी योजना के माध्यम से विकास कार्यों को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और वनांचल में रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना प्राथमिकता है।
स्थानीय संसाधन और पारंपरिक हुनर बनेंगे विकास की ताकत
वनांचल क्षेत्र में विकास की इस पहल का फोकस केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा, स्थानीय कला-कौशल, प्राकृतिक संसाधन, पर्यटन और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़कर समग्र विकास मॉडल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
मेचका में पर्यटन, कल्लेमेटा में बांस कला, शहद प्रसंस्करण, कोसा-लाख आधारित गतिविधियां और सांकरा में नारियल उत्पादन जैसी पहलें आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय जरूरतों और ग्रामीणों की भागीदारी के आधार पर कार्ययोजना तैयार कर वनांचल को विकास की मुख्यधारा से और मजबूती से जोड़ा जाएगा।








