ओबीसी महासभा ने जातिवार जनगणना को लेकर केंद्र सरकार को दी चेतावनी

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 ओबीसी महासभा ने जातिवार जनगणना को लेकर केंद्र सरकार को दी चेतावनी


उत्तम साहू 

नगरी। छत्तीसगढ़ ओबीसी महासभा ने केंद्र सरकार से आगामी राष्ट्रीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातिवार जनगणना कराए जाने की मांग की है। महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यदि केंद्र सरकार एसटी-एससी की तरह ओबीसी समाज की भी जातिवार जनगणना नहीं कराती है, तो देशभर में ओबीसी समाज इसके विरोध में आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।


आलोक सिन्हा ने कहा कि ओबीसी समाज लंबे समय से अपनी वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के आंकड़े सामने लाने के लिए जातिवार जनगणना की मांग करता रहा है। उनका कहना है कि बिना सही आंकड़ों के ओबीसी समाज के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं, आरक्षण और कल्याणकारी नीतियों का प्रभावी मूल्यांकन संभव नहीं है।


उन्होंने कहा कि देश की आजादी के 80 वर्ष बाद यदि पशु-पक्षियों, वन और पेड़-पौधों की गणना की जा सकती है, तो देश की बड़ी आबादी वाले ओबीसी समाज की जातिवार गणना क्यों नहीं की जा सकती। महासभा का कहना है कि जनगणना में ओबीसी की वास्तविक संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा सामने आना जरूरी है।


महासभा ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार पूरी जानकारी और पारदर्शिता के साथ ओबीसी की जातिवार जनगणना नहीं कराती है, तो ओबीसी समाज जनगणना के बहिष्कार सहित लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने पर विचार करेगा। संगठन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लगातार उपेक्षा किए जाने की स्थिति में आने वाले समय में राजनीतिक स्तर पर भी ओबीसी समाज अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य हो सकता है।


प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक सिन्हा ने कहा कि ओबीसी समाज अपने अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर एकजुट है। महासभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की जातिवार गणना को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि देश में सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में ठोस नीतियां बनाई जा सकें।


ओबीसी समाज का अलग से कॉलम बनाने की मांग


ओबीसी महासभा ने जनगणना में ओबीसी समाज के लिए अलग से कॉलम निर्धारित करने की मांग भी उठाई है। महासभा का कहना है कि अलग कॉलम में जातिवार आंकड़े दर्ज होने से ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक स्थिति का प्रमाणिक आंकड़ा उपलब्ध हो सकेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार कर आगामी जनगणना में ओबीसी की जातिवार गणना सुनिश्चित करने की अपील की है।

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