कर्णेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा के साथ मनाई गई तुलसीदास जयंती
मानस सम्मेलन में गूंजे रामचरितमानस के प्रसंग, श्रद्धालुओं ने लिया आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प
उत्तम साहू
सिहावा/देउरपारा। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। मानस शक्ति केंद्र सांकरा के तत्वावधान में आयोजित मानस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मानस प्रेमी एवं धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भजन-कीर्तन, मानस पाठ और “जय श्रीराम” एवं “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री कर्णेश्वर महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष विकल गुप्ता ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने भगवान कर्णेश्वर महादेव एवं गोस्वामी तुलसीदास जी के समक्ष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और आयोजन की सफलता की कामना की। इसके पश्चात मानस सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ।
मानस सम्मेलन में रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का वाचन एवं भावपूर्ण व्याख्या की गई। मानस वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन, व्यक्तित्व एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, सत्य, धर्म, त्याग, सेवा और मर्यादा का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। रामचरितमानस आज भी समाज को संस्कार, सद्भाव और नैतिक जीवन की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
इस अवसर पर रामचरितमानस की चौपाइयों की सुंदर प्रस्तुति के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी हुए। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से मानस पाठ एवं प्रवचन का श्रवण किया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और संस्कारों की आवश्यकता है। रामचरितमानस के आदर्श इन मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में मानस शक्ति केंद्र सांकरा के अध्यक्ष तुकाराम साहू, जनपद सदस्य पन्नालाल ध्रुव, मोहन पुजारी, बंटी छाजेड़, योगेश साहू, चंद्रभान यादव, डोमार मिश्रा, राजेंद्र पुरी गोस्वामी, देवव्रत गौतम, तिहारू राम यादव एवं परमेश्वर निषाद सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं मानस प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सिहावा के दुर्गेश पटेल ने किया।
श्री कर्णेश्वर महादेव ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान कर्णेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन कर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
आयोजकों ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सनातन परंपराओं को मजबूत करने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं धार्मिक साहित्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। तुलसीदास जी के आदर्शों और रामचरितमानस के संदेश को जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और मर्यादा की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने रामचरितमानस के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। अंत में भगवान कर्णेश्वर महादेव की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


