पारंपरिक हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ छिंदपुर में हुआ भोजली विसर्जन
लोकगीतों और ‘अहो देवी गंगा’ के जयकारों से गूंजा गांव, मीत-मितान की परंपरा निभाकर लिया बुजुर्गों का आशीर्वाद
छिंदपुर/कटघोरा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे का प्रतीक भोजली पर्व आदर्श ग्राम छिंदपुर में पारंपरिक हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में निकली भोजली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां, युवा एवं ग्रामीण शामिल हुए।
भोजली शोभायात्रा का शुभारंभ गांव के बड़े गौटिया गोपाल सिंह (शैलेंद्र) राठौर के निवास से हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं एवं युवतियों ने सिर पर भोजली धारण कर पूरे गांव का भ्रमण किया। इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों और ‘अहो देवी गंगा...’ के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा।
शोभायात्रा के दौरान ग्राम के विभिन्न इष्ट देवी-देवताओं के मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने देवी-देवताओं से गांव में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद भोजली को जूना तालाब में श्रद्धापूर्वक विसर्जित किया गया।
विसर्जन के पश्चात ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘मीत-मितान’ परंपरा का निर्वहन किया। एक-दूसरे के कानों में भोजली खोंचकर आपसी प्रेम, मित्रता और भाईचारे का संकल्प लिया गया। साथ ही उपस्थित बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर भाजयुमो जिला नीति अनुसंधान सहप्रमुख एवं विधायक प्रतिनिधि कृष्णानंद राठौर, मंडल उपाध्यक्ष हुलेश राठौर, ओम प्रकाश राठौर, गंगाराम श्रीवास, रामबिलास कैवर्त, तेरस यादव, केवल यादव, गिरधर गोस्वामी, बाबूलाल श्रीवास, बजरंग यादव, शत्रुघ्न दास, भुरू यादव, जगदीश यादव, संजय श्रीवास, मिथुन यादव, भुनेश्वर श्रीवास, लक्ष्मीनारायण बियार, लंबोदर श्रीवास, शशि श्रीवास, ईश्वर अनंत, चंचल श्रीवास, श्रीमती पूर्णिमा राठौर, सहोदरा बाई सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा साथी एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
भोजली पर्व के आयोजन ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण समाज में कायम आपसी प्रेम एवं सौहार्द की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

