राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी की मांदर थाप, सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की छटा
स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में हुई पारंपरिक लोकनृत्य की गरिमामयी प्रस्तुति, ग्रामीण अंचल की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
उत्तम साहू
नगरी,धमतरी, 18 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं की सशक्त झलक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापार) के सुप्रसिद्ध ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ ने 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में पारंपरिक लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।
राष्ट्रपति भवन जैसे देश के प्रतिष्ठित संवैधानिक परिसर में मांदर की गूंज, पारंपरिक गीतों और सामूहिक नृत्य की लय ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। ग्रामीण अंचल के कलाकारों के लिए यह अवसर उनकी वर्षों की कला-साधना के सम्मान के साथ-साथ धमतरी जिले और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण रहा।
मांदर की थाप में जीवंत हुई जनजातीय संस्कृति
सरईटोला का लोक नृत्य दल अपनी विशिष्ट पारंपरिक नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, लोकगीतों, पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों के लिए जाना जाता है। दल की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लोकजीवन, उत्सव, सामाजिक सरोकार, सामुदायिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, आभूषण और साज-सज्जा ने कलाकारों की प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया। यह नृत्य महज मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकस्मृतियों, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने वाली जीवंत परंपरा है। फसल कटाई, उत्सव, मेले तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों पर इसकी विशेष प्रस्तुति की परंपरा रही है।
नागपुर सांस्कृतिक भवन द्वारा हुआ विशेष चयन
दल के सचिव रूपराय नेताम ने बताया कि नागपुर सांस्कृतिक भवन द्वारा दल की उत्कृष्ट प्रस्तुति और पारंपरिक कला की विशिष्टता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति के लिए दल का चयन किया गया। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला प्रस्तुत करना सभी कलाकारों के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है।
सरईटोला से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची प्रतिभा
इस ऐतिहासिक अवसर पर सरईटोला के रतन लाल निषाद, सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी, कु. सुलोचना सोरी और कु. मधु नेताम सहित दल के कलाकारों ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंची यह सांस्कृतिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि लोककला आज भी अपनी मौलिकता, जीवंतता और जनसरोकारों के कारण लोगों के हृदय में गहरी जगह बनाए हुए है। यह उपलब्धि जिले के युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणादायी है और संदेश देती है कि अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहकर स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।
कलेक्टर ने कलाकारों को दी बधाई
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कलाकारों और समिति के सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्रीय मंच पर धमतरी जिले की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे जिले के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने के साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जुड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि धमतरी की पहचान केवल प्राकृतिक और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोककला, लोकसंगीत, जनजातीय परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता भी जिले की विशिष्ट पहचान हैं। सरईटोला के कलाकारों की राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति ने इस पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।

