मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली बनेगी आस्था और प्रकृति पर्यटन का आकर्षण

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मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली बनेगी आस्था और प्रकृति पर्यटन का आकर्षण

मेचका की मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित प्राचीन आश्रम और प्राकृतिक सौंदर्य को संवारने की दिशा में पहल



उत्तम साहू 

नगरी, धमतरी, 19 अगस्त 2026। धमतरी जिले के वनांचल नगरी-सिहावा क्षेत्र की प्राकृतिक और आध्यात्मिक विरासत में मेचका स्थित मांदागिरी पर्वत का विशेष महत्व है। मेचका गांव के समीप मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में प्रसिद्ध है। नगरी से करीब 27 किलोमीटर पूर्व स्थित यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति, साहसिक और ट्रेकिंग पर्यटन की दृष्टि से भी अपार संभावनाएं रखता है।



पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा मांधाता के पुत्र थे। उन्होंने देवताओं की सहायता के लिए असुरों के विरुद्ध लंबे समय तक युद्ध किया। युद्ध के उपरांत विश्राम के लिए उन्हें देवताओं से वरदान प्राप्त हुआ। मुचुकुंद ऋषि से जुड़ी पौराणिक कथाओं में उनकी तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति का उल्लेख मिलता है। सिहावा-नगरी का अंचल प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में प्रतिष्ठित रहा है और सप्तऋषियों की तपस्थली से जुड़ी मान्यताएं इस क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और समृद्ध करती हैं।

प्राचीन आश्रम और प्राकृतिक सौंदर्य बना आकर्षण



मांदागिरी पर्वत पर स्थित आश्रम के आसपास का प्राकृतिक वातावरण मन को मोह लेने वाला है। यहां सुंदर तालाब, प्राचीन मूर्तियां तथा माता सीता सहित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। स्थानीय वनवासी समुदाय के साथ ही दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं।

पर्वतीय भू-भाग होने के कारण मांदागिरी में ट्रेकिंग और एडवेंचर पर्यटन की भी अच्छी संभावनाएं हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से आसपास फैले घने वनांचल और सोंढूर जलाशय (डेम) का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। प्राकृतिक वातावरण, पहाड़ी मार्ग और जलाशय का विहंगम दृश्य इस स्थल को प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना सकता है।

समग्र विकास की दिशा में प्रशासन की पहल



कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली धमतरी की समृद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस स्थल का समग्र विकास किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वे जल्द ही टीम के साथ मांदागिरी का भ्रमण कर स्थल की वर्तमान स्थिति और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा।

धार्मिक पर्यटन के साथ रोजगार की भी संभावना

मांदागिरी क्षेत्र में यदि सुविधाओं का सुव्यवस्थित विकास किया जाता है तो यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति एवं ट्रेकिंग आधारित पर्यटन के लिए भी नई पहचान बना सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय समुदाय की सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर होम-स्टे, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, मार्गदर्शक सेवाओं और अन्य स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। मांदागिरी को उसकी धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान के अनुरूप विकसित किया गया तो यह नगरी-सिहावा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में उभर सकता है।

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