आजादी के 79 साल बाद भी वनांचल की तस्वीर नहीं बदली
बीमार ग्रामीण को खाट पर लादकर उफनता नाला पार कराने की मजबूरी, पुल के लिए वर्षों से गुहार लगा रहे ग्रामीण
उत्तम साहू
धमतरी। देश आजादी के 79 वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन धमतरी जिले के वनांचल में विकास की हकीकत आज भी कई सवाल खड़े करती है। कहीं सड़क नहीं तो कहीं पुल-पुलिया का अभाव ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है। बारिश आते ही इन इलाकों में आवागमन की समस्या और गंभीर हो जाती है। हालात ऐसे हैं कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना पड़ता है।
ग्राम पंचायत लटियारा के चर्रा कच्छारपारा में शुक्रवार सुबह ऐसी ही तस्वीर सामने आई, जब अचानक बीमार हुए ग्रामीण गोपेश पटेल को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों ने उन्हें खाट पर बैठाया और चार लोगों ने मिलकर उफनते डुमर नाले को पार कराया। लगातार बारिश के कारण नाला ओवरफ्लो था और पानी तेज बहाव के साथ बह रहा था। इसके बावजूद मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना जरूरी था। लिहाजा ग्रामीणों के सामने जोखिम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
हर बारिश में यही कहानी, फिर भी नहीं बनी पुलिया
ग्रामीणों के मुताबिक, डुमर नाले पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को होती है। नाला उफान पर आने के बाद गांव का संपर्क भी प्रभावित हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है। हर साल बारिश के मौसम में ऐसी तस्वीर सामने आती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर से लेकर शासन-प्रशासन और मुख्यमंत्री तक अपनी समस्या पहुंचाई है। पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्री के समक्ष भी क्षेत्र की समस्या रखे जाने का दावा ग्रामीण कर रहे हैं, लेकिन वर्षों बाद भी डुमर नाले पर पुल निर्माण की मांग अधूरी है।
ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब बदलेगी तस्वीर?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि डुमर नाले पर जल्द पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दिनों में किसी मरीज को खाट पर लादकर उफनता नाला पार कराने की नौबत न आए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन तक पहुंचें, तभी वनांचल की तस्वीर बदलेगी।
आजादी के 79 साल बाद भी अगर किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट ही सहारा बन जाए, तो यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों तक विकास की पहुंच पर बड़ा सवाल है।

