द कंपटीशन अकैडमी नगरी में शिक्षक दिवस पर गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ स्मरण
भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद-ग्रंथों और महान गुरुओं के योगदान से विद्यार्थियों को कराया अवगत
नगरी। द कंपटीशन अकैडमी नगरी में शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कृति और ज्ञान की समृद्ध विरासत को समर्पित विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान तथा वेद-ग्रंथों में वर्णित गुरु के महत्व से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय परंपरा में गुरु के सर्वोच्च स्थान और उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल पुस्तकीय शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह अपने शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण कर उसे जीवन की सही दिशा प्रदान करने वाला मार्गदर्शक भी होता है।
कार्यक्रम में महर्षि वेदव्यास, गुरु द्रोणाचार्य, आचार्य चाणक्य और स्वामी विवेकानंद जैसे महान गुरुओं एवं आचार्यों के जीवन, उनके विचारों और समाज निर्माण में उनके योगदान का उल्लेख किया गया। उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और जीवन मूल्यों के महत्व को समझाया गया।
वेदों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न संदर्भों के माध्यम से विद्यार्थियों को “गुरु का सम्मान, ज्ञान का सम्मान” का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव अत्यंत सम्माननीय स्थान प्राप्त रहा है और गुरु-शिष्य का संबंध हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान है।
इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शिक्षकों के प्रति आदर भाव, संस्कार, अनुशासन तथा भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।
द कंपटीशन अकैडमी नगरी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम ने उन्हें आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम में अकैडमी एवं लाइब्रेरी के सभी कर्मयोद्धा और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे तथा सभी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा और गुरु के प्रति सम्मान का संकल्प लिया।



