बारिश आई,लेकिन खेतों की प्यास नहीं बुझी; वनांचल नगरी क्षेत्र में फसलें संकट में,किसान चिंतित
राजस्व विभाग से सर्वे कराकर फसल मुआवजा देने की मांग, मनोज साक्षी ने वनांचल क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की उठाई मांग
उत्तम साहू
नगरी। वनांचल क्षेत्र में खरीफ फसलों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। कभी अत्यधिक बारिश और उसके बाद लंबे समय तक पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। खेतों में नमी की कमी और सिंचाई सुविधाओं के अभाव ने आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसे लेकर आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मनोज साक्षी ने शासन-प्रशासन से तत्काल राजस्व सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित फसल मुआवजा देने की मांग की है।
मनोज साक्षी ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ही मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। शुरुआती दौर में हुई तेज बारिश का पानी खेतों में पर्याप्त रूप से नहीं रुक पाया और जंगलों, नदी-नालों के रास्ते बह गया। इसके बाद बारिश की कमी ने खेतों में खड़ी फसलों को संकट में डाल दिया है।
उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्र के बोरई, रिसगांव, खल्लारी, कसपुर, एकावरी, बहीगांव, फरसगांव और ठोठाझरिया सहित अनेक गांवों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है। यहां के किसान मुख्य रूप से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में समय पर और पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित अन्य खरीफ फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
मनोज साक्षी ने कहा कि वनांचल में बसे अधिकांश आदिवासी किसान खेती के लिए कर्ज लेते हैं और फसल उत्पादन से होने वाली आय पर ही उनके परिवार का जीवन निर्भर करता है। खेती से आमदनी नहीं होने की स्थिति में किसानों के सामने कर्ज चुकाने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
उन्होंने शासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल राजस्व विभाग की टीम भेजकर फसलों का वास्तविक सर्वे कराया जाए और नुकसान के आधार पर किसानों को शीघ्र फसल मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही वनांचल क्षेत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए इसे सूखाग्रस्त घोषित करने, किसानों का कर्ज माफ करने तथा गरीब एवं मजदूर वर्ग के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
मनोज साक्षी ने कहा कि यदि समय रहते किसानों को राहत नहीं मिली तो वनांचल के हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। शासन-प्रशासन को किसानों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत और सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।


