विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका

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विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम : ब्रह्माकुमारी भावना बहन

ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र नगरी में शिक्षक सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी आयोजित


उत्तम साहू 

नगरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवाकेंद्र नगरी में शिक्षक सम्मान समारोह के अवसर पर “विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर आधारित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की और शिक्षा, संस्कार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र पर माल्यार्पण तथा परमपिता शिव परमात्मा की स्मृति में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात ब्रह्माकुमारी कमलेश्वरी बहन ने उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं का पुष्पगुच्छ एवं आत्मिक स्मृति तिलक लगाकर अभिनंदन किया।

समारोह में संस्था की राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भावना बहन के साथ शासकीय सुखराम महाविद्यालय नगरी-सिहावा के प्रोफेसर कौशल नायक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सांकरा के व्याख्याता रविशंकर साहू, शासकीय श्री श्रृंगी ऋषि उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल नगरी की व्याख्याता दिव्या जैन, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घोटगांव की व्याख्याता विजयलक्ष्मी साहू, कवि एवं सेवानिवृत्त व्याख्याता रंजन सार्वा, वृद्धाश्रम एवं पीएससी कोचिंग इंस्टीट्यूट नगरी की संचालक इंदु पटेल सहित अंचल के बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पिताम्बर भाई ने शिक्षकों के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया, वहीं कुमारी शांता ने स्वागत नृत्य की सुंदर प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।


ज्ञान के साथ चरित्रवान बनाना भी शिक्षक का दायित्व

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और श्रेष्ठ संस्कारों का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का ज्ञानवान होने के साथ-साथ चरित्रवान बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि ज्ञानवान व्यक्ति को लोग कुछ समय तक याद रखते हैं, लेकिन श्रेष्ठ चरित्र वाला व्यक्ति सदैव समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना रहता है। ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने परमपिता शिव परमात्मा को सर्वोच्च शिक्षक बताते हुए कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलकर जीवन में श्रेष्ठता और दिव्यता लाई जा सकती है। नियमित राजयोग एवं मेडिटेशन के माध्यम से जीवन में सुख, शांति, प्रेम, माधुर्यता और सद्भाव जैसे गुणों का विकास किया जा सकता है। उन्होंने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में आने तथा सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन कोर्स करने का आग्रह भी किया।


बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देना भी जरूरी

व्याख्याता रविशंकर साहू ने कहा कि हमारा विश्व पहले भी विकसित था, आज भी विकसित है और भविष्य में भी विकसित रहेगा। आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य स्वयं और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान भी देना चाहिए तथा विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुरूप उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए।

प्रोफेसर कौशल नायक ने कहा कि पहले ज्ञान प्राप्त करने के संसाधन सीमित थे, जबकि आज विद्यार्थियों के सामने ज्ञान और तकनीक के असीमित संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है। शिक्षकों को विद्यार्थियों की मानसिकता को समझते हुए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान करनी चाहिए, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।


अनुभव और कविताओं से बताई शिक्षक की महत्ता

कवि एवं सेवानिवृत्त व्याख्याता रंजन सार्वा ने अपने शिक्षकीय जीवन के अनुभव साझा किए और अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में शिक्षक की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

व्याख्याता दिव्या जैन ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि हमें उन महान शिक्षकों के आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए, जिनकी प्रेरणा से आज शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

व्याख्याता विजयलक्ष्मी साहू ने कहा कि बच्चों को पढ़ाना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन उनकी मानसिकता और क्षमता के अनुरूप ज्ञान देना एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने गीत के माध्यम से भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।

इंदु पटेल ने कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य के निर्माता और मार्गदर्शक होते हैं। विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य काफी हद तक शिक्षकों के मार्गदर्शन और संस्कारों पर आधारित होता है।

कार्यक्रम के अंत में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भावना बहन द्वारा उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को ईश्वरीय भेंट प्रदान कर सम्मानित किया गया। मन्नूलाल साहू ने सभी अतिथियों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन निशा साहू ने किया।

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