जोगी कांग्रेस की कांग्रेस में वापसी की राह खुली, विलय पर फैसले का इंतजार
रेणु जोगी और अमित जोगी ने पहले ही दिया है विलय का आवेदन, 27 सितंबर को प्रदेश प्रभारी की बैठक पर टिकी निगाहें
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर जोगी परिवार और कांग्रेस के बीच रिश्तों को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) यानी जेसीसीजे के कांग्रेस में विलय की संभावना को लेकर सियासी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। हालांकि, विलय को लेकर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन जोगी परिवार की ओर से कांग्रेस में वापसी की इच्छा पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रेणु जोगी और प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कांग्रेस में पार्टी के विलय के लिए आवेदन दिया था। दिसंबर 2024 में भी इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के समक्ष पत्र दिया गया था। अब सितंबर 2026 में कांग्रेस संगठन में निष्कासित नेताओं की वापसी की प्रक्रिया के बीच जेसीसीजे के विलय का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस की अनुशासन समिति ने हाल में विभिन्न नेताओं की वापसी से जुड़े मामलों पर चर्चा की। कुछ नेताओं का निष्कासन रद्द कर दिया गया, लेकिन रेणु जोगी और अमित जोगी से जुड़े प्रकरणों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू के अनुसार, जोगी कांग्रेस का मामला सीधे पार्टी के विलय से जुड़ा है और इस पर प्रदेश के नए प्रभारी सुखदेव भगत तथा शीर्ष नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद निर्णय होगा।
27 सितंबर की बैठक पर नजर
अब सबकी निगाहें कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के 27 सितंबर को प्रस्तावित रायपुर दौरे पर टिकी हैं। इस दौरान प्रदेश संगठन के नेताओं के साथ होने वाली बैठक में जेसीसीजे के विलय समेत कांग्रेस में नेताओं की वापसी से जुड़े मामलों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
अजीत जोगी की राजनीतिक विरासत फिर केंद्र में
जेसीसीजे के कांग्रेस में संभावित विलय की चर्चा महज संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय के दोबारा खुलने के रूप में देखी जा रही है। स्वर्गीय अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2016 में कांग्रेस से अलग होने के बाद उन्होंने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने बसपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा और गठबंधन को सात सीटें मिलीं, जिनमें जेसीसीजे की पांच सीटें शामिल थीं।
अजीत जोगी का राजनीतिक प्रभाव उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल से आगे भी छत्तीसगढ़ की राजनीति में महसूस किया गया। राज्य निर्माण के बाद शुरुआती दौर में प्रशासनिक ढांचे और विकास की दिशा को लेकर उनके कार्यकाल को छत्तीसगढ़ की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। समर्थक आज भी उनकी राजनीतिक विरासत और छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़े उनके मुद्दों को याद करते हैं।
अमित जोगी की अलग राजनीतिक पहचान
अमित जोगी ने भी अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए जेसीसीजे की राजनीति को जारी रखा। वे विभिन्न मौकों पर राज्य सरकार और भाजपा की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था।
ऐसे में यदि जेसीसीजे का कांग्रेस में औपचारिक विलय होता है, तो यह केवल दो राजनीतिक संगठनों के एक साथ आने का मामला नहीं होगा, बल्कि वर्ष 2016 में कांग्रेस से अलग हुई जोगी राजनीतिक धारा के कांग्रेस में लौटने का घटनाक्रम भी होगा।
विलय से क्या बदलेगा, फैसला भविष्य बताएगा
जेसीसीजे के कांग्रेस में विलय से संगठनात्मक स्तर पर क्या बदलाव होंगे और जोगी परिवार की राजनीतिक भूमिका किस रूप में तय होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अंतिम निर्णय भी बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अजीत जोगी का नाम एक अलग अध्याय से जुड़ा रहा है। अब उनके परिवार की कांग्रेस में संभावित वापसी ने उस राजनीतिक अध्याय को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व का निर्णय यह तय करेगा कि जोगी कांग्रेस और कांग्रेस के बीच वर्षों से चली आ रही राजनीतिक दूरी वास्तव में समाप्त होती है या यह चर्चा एक और मोड़ लेती है।

