उत्तम साहू
धमतरी (मगरलोड): ग्राम पंचायत मोहंदी के आश्रित गांव जामली के ग्रामीणों को राशन के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है। शासन की योजनाओं और खाद्य सुरक्षा कानून के बावजूद खाद्य विभाग की लापरवाही और उदासीन रवैये के चलते ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है।
2 किलोमीटर दूर जाना मजबूरी, विभाग मौन
ग्राम पंचायत मोहंदी की सरपंच श्रीमती अनिता लहरे और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को पत्र सौंपकर खाद्य विभाग और प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्राप्त आवेदन के अनुसार, ग्राम जामली में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 के तहत कुल 274 राशनकार्डधारी परिवार निवास करते हैं, जिनमें: प्राथमिकता कार्डधारी: 229 परिवार अंत्योदय कार्डधारी: 38 परिवार सामान्य (एपीएल) कार्डधारी: 07 परिवार है।
वर्तमान में उचित मूल्य की दुकान ग्राम पंचायत मोहंदी में संचालित है, जो जामली से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को 2 किलोमीटर पैदल चलकर राशन सामग्री ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बार-बार आवेदन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
सरपंच एवं ग्रामीणों का आरोप है कि जामली में ही पृथक राशन दुकान खोलने या वितरण व्यवस्था शुरू करने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बावजूद खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, न ही ग्रामीणों को किसी तरह की कार्रवाई की सूचना दी गई है।
ग्राम पंचायत मोहंदी ने कलेक्टर से पुनः गुहार लगाते हुए आश्रित गांव जामली में जल्द से जल्द उचित मूल्य की दुकान संचालित कराने की मांग की है, ताकि गरीब परिवारों को उनके हक का राशन आसानी से मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
