धमतरी..पंचायतों की खाली जमीन अब बनेगी कमाई का जरिया
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की पहल से धमतरी में PPP मॉडल पर बढ़ेगी पंचायतों की ‘अपनी आय’, व्यावसायिक परिसर से लेकर यूनिपोल-होर्डिंग तक पर फोकस
उत्तम साहू,धमतरी, 13 सितंबर 2026। ग्राम पंचायतों को सिर्फ सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय से विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए धमतरी जिले में नया प्रयोग शुरू किया गया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में पंचायतों की उपलब्ध जमीन और परिसंपत्तियों को आय का स्थायी स्रोत बनाने के लिए PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल तैयार किया जा रहा है। इसके तहत पंचायत क्षेत्रों में व्यावसायिक परिसरों, यूनिपोल, होर्डिंग सहित नियमसम्मत व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस पहल के तहत जिले में मुख्य मार्गों, बाजार क्षेत्रों और प्रमुख आबादी वाले इलाकों के आसपास पंचायतों की ऐसी जमीन चिन्हांकित की गई है, जहां व्यावसायिक गतिविधियों की पर्याप्त संभावना है। राजस्व अमले के माध्यम से भूमि चिन्हांकन और पंचायतों के नाम आबंटन की प्रक्रिया के बाद गाइडलाइन दर तथा प्रस्तावित निर्माण लागत को आधार बनाकर नियमानुसार बेस रेट तय किया जा रहा है। इसके बाद पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के जरिए व्यावसायिक परिसरों के आबंटन की कार्रवाई होगी।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने पंचायतों की परिसंपत्तियों को ‘कमाई की संपत्ति’ में बदलने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना स्थानीय स्वशासन को पूरी तरह प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। उपलब्ध भूमि और परिसंपत्तियों का पारदर्शी, नियमसम्मत और जनहितकारी उपयोग कर पंचायतों की स्वयं की आय लगातार बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
विकास कार्यों के लिए बढ़ेंगे पंचायतों के संसाधन
पंचायतों की आय बढ़ने से पेयजल, स्वच्छता, स्थानीय अधोसंरचना, सामुदायिक भवनों और अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव जैसे कामों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। वहीं PPP आधारित व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जिले में पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम को डिजिटल स्वरूप में संचालित करने के साथ समर्थ पोर्टल के जरिए पंचायतों की प्रगति की निगरानी भी की जा रही है। प्रशासन का फोकस पंचायतों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर परिसंपत्ति प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करने पर है।
ग्राम पंचायतों की ‘स्वयं की आय’ बढ़ाना 16वें वित्त आयोग की परफॉरमेंस ग्रांट के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में धमतरी का यह मॉडल पंचायतों को केवल अनुदान आधारित व्यवस्था से निकालकर आय सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


