सोंढुर नदी के तट पर रिवर कैंपिंग से बढ़ेगा ग्रामीण पर्यटन, रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते
सेवा संकल्प अभियान के तहत घीकुड़िया में आयोजन, लोकसंस्कृति, पक्षी अवलोकन और कमार जनजाति की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा से रूबरू हुए प्रतिभागी
नगरी,धमतरी, 16 अक्टूबर 2026। जिले में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने की दिशा में सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्राम घीकुड़िया में रिवर कैंपिंग एवं ग्रामीण पर्यटन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 14 अक्टूबर को सोंढुर नदी के किनारे आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं, युवाओं, बच्चों, बुजुर्गों और पर्यटन विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्राकृतिक सौंदर्य, लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को समझने के साथ स्थानीय समुदाय को इससे जोड़ने पर जोर दिया गया।
सोंढुर नदी का रेतीला तट, आसपास का प्राकृतिक वातावरण और ग्रामीण जीवनशैली इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया कि स्थानीय सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखते हुए ग्रामीण पर्यटन को आजीविका का माध्यम कैसे बनाया जा सकता है।
लोककला और परंपराओं से पर्यटकों को जोड़ने की पहल
कार्यक्रम में ग्रामीणों के साथ स्थानीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। गांव में प्रचलित ददरिया, राउत नाचा, बाँसगीत और मानस पाठ जैसी लोकविधाओं को पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान सोंढुर नदी के तट पर बांसुरी वादन और पारंपरिक बाँसगीत की प्रस्तुति ने माहौल को खास बना दिया। नदी की शांत लहरों के बीच लोकसंगीत की मधुर धुनों ने प्रतिभागियों को ग्रामीण संस्कृति से करीब से जुड़ने का अवसर दिया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्रामीण पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों के भ्रमण तक सीमित न रखकर पर्यटकों को स्थानीय रहन-सहन, खानपान, लोकसंगीत और परंपराओं का अनुभव भी कराया जाना चाहिए।
तारों भरे आसमान के नीचे टेंट कैंपिंग का अनुभव
रिवर कैंपिंग गतिविधि के तहत सोंढुर नदी के रेतीले तट पर टेंट लगाए गए, जहां प्रतिभागियों ने रात्रि विश्राम किया। नदी किनारे खुले आसमान के नीचे कैंपिंग करना उनके लिए नया और यादगार अनुभव रहा। प्रतिभागियों के लिए रात्रि भोजन और सुबह के नाश्ते की व्यवस्था भी की गई।
इस गतिविधि के माध्यम से ग्रामीणों को पर्यटकों के लिए टेंट कैंपिंग, स्थानीय भोजन, अतिथि सत्कार और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाओं से परिचित कराया गया। विशेष रूप से ग्रामीण युवतियों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और युवाओं को पर्यटन गतिविधियों में भागीदारी के अवसरों की जानकारी दी गई, ताकि वे भविष्य में अपने गांव में ही स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के अवसरों पर चर्चा
कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं और पर्यटन विशेषज्ञों के बीच पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाओं पर संवाद हुआ। स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक नाश्ते की व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, पर्यटकों के लिए आतिथ्य सेवाएं तथा कैंपिंग से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि यदि ग्रामीण पर्यटन का संचालन स्थानीय समुदाय की भागीदारी से किया जाए, तो महिलाओं, युवाओं और पारंपरिक कलाकारों को गांव में ही आय अर्जित करने के अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक कलाओं को भी पहचान मिलेगी। साथ ही पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
पक्षी अवलोकन से सामने आई प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाएं
कैंपिंग के अगले दिन सुबह प्रतिभागियों ने सोंढुर नदी के आसपास पक्षी अवलोकन यानी बर्ड वॉचिंग गतिविधि में हिस्सा लिया। नदी तट और आसपास के प्राकृतिक परिवेश में पक्षियों की गतिविधियों को देखने का अवसर मिला। स्थानीय जानकारी के अनुसार, घीकुड़िया क्षेत्र में पक्षियों की सौ से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यह विविधता क्षेत्र को पक्षी अवलोकन और प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए संभावनाओं से भरपूर बनाती है।
सुबह के समय प्रतिभागियों ने नदी में स्नान का भी आनंद लिया। इन गतिविधियों के जरिए प्रकृति के करीब समय बिताने के साथ स्थानीय प्राकृतिक संपदा के महत्व को समझने का अवसर मिला। क्षेत्र में पक्षी अवलोकन को व्यवस्थित पर्यटन गतिविधि के रूप में विकसित करने से प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।
कमार जनजाति की पारंपरिक मत्स्य आखेट पद्धति से परिचय
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण कमार जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति से जुड़े पारंपरिक ज्ञान से परिचित होना रहा। प्रतिभागियों को कमार जनजाति की पारंपरिक मछली पकड़ने की ‘रेड़ी बांधना’ पद्धति के बारे में जानकारी दी गई और इस पारंपरिक गतिविधि का अनुभव कराया गया।
इस दौरान नदी और स्थानीय जनजीवन के बीच के संबंधों को समझने का अवसर मिला। पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल और अनुभवजन्य ज्ञान को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया। इससे पर्यटक स्थानीय जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से जान सकेंगे, वहीं पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के साथ विकसित होगा पर्यटन
घीकुड़िया में आयोजित रिवर कैंपिंग एवं ग्रामीण पर्यटन प्रशिक्षण कार्यक्रम ने सोंढुर नदी तट पर पर्यटन विकास की संभावनाओं को सामने रखा। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पक्षियों की विविधता, कमार जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, लोककलाएं और ग्रामीण खानपान मिलकर एक विशिष्ट पर्यटन अनुभव तैयार कर सकते हैं।
रिवर कैंपिंग, पक्षी अवलोकन, लोकसंगीत और ग्रामीण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों जैसी गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने पर स्थानीय महिलाओं, युवाओं, कलाकारों और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं।
इसके साथ ही पर्यटन गतिविधियों के संचालन में नदी की स्वच्छता, प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देना भी जरूरी होगा। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से पर्यटन को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे और ग्रामीणों को आर्थिक लाभ भी मिले।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है। सोंढुर नदी के तट पर प्रकृति, लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं का संगम घीकुड़िया को भविष्य में सामुदायिक पर्यटन के एक विशिष्ट केंद्र के रूप में पहचान दिलाने की संभावनाएं रखता है।

