शिक्षक अपने फर्ज के खातिर जान हथेली पर लेकर स्कूल जाते हैं स्कूल
कमार बाहुल्य घोरागांव बारिश में गया है टापू जनजीवन प्रभावित
ग्रामीण शासन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से पुल बनाने की मांग करते थक चुके हैं
उत्तम साहू, दबंग छत्तीसगढ़िया न्यूज
नगरी/ धमतरी जिले के आदिवासी विकास खंड नगरी के अंतिम छोर पर बसा ग्राम घोरागांव बारिश के दिनों में टापू में तब्दील हो गया है, जिसके चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है,
बता दें कि घोरागांव में कमार जनजाति के लोग निवास करते हैं, इस गांव में पहुंचने के लिए जंगल रास्ता से सोंढूर नदी को पार करना पड़ता है, यह नदी आज कल पूरे उफान पर है, इस खबर से विकास के सरकारी दावा का पोल खुलते नजर आ रहा है, इस गांव में पदस्थ शिक्षक सारी कठिनाईयों को झेलते हुए अपने कर्त्तव्य पथ पर अग्रसर होकर जान हथेली में लेकर नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं, और बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं,
गौरतलब है कि एक ओर जहाँ शासन के द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, तो वहीं सिहावा विधानसभा के अंतिम छोर पर बीहड़ जंगलो के बीच घोरागांव में बसे ग्रामीणों को रोजमर्रा के चीजों के लिए जूझना पड़ रहा है, ग्रामीणों के इस समस्या का समाधान करने का पहल आज तक किसी भी सरकार ने प्रयास नहीं किया है, घोरागांव इन समस्याओं को लेकर प्रधान पाठक गजानंद सोन से संपर्क करने पर बताया कि विद्यालय व गाँव तक पहुंचने के लिए जंगली रास्ते के बीच दो नाले, के साथ उफनती सोंढूर नदी को पार करना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में गाँव तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती है। दोनों नालो में रपटा नहीं है।गाँव वाले अनेकों बार शासन प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से नदीं में पुल बनाने हेतु निवेदन करके थक गए हैं। ज्ञात हो कि इस आदिवासी बहुल ग्राम में कमार जाति के लोग अधिक है। सरकार कमार जाति को विकाश की मुख्य धारा से जोड़ना चाहती हैं, किन्तु समस्या जस की तस है। ग्रामीणों के साथ साथ हमें भी प्रतिदिन जान जोखिम में रख कर कर्त्तब्य पथ पर सभी शिक्षक साथियों को उफनती नदी को पार करना पड़ता है। गाँव वालो को राशन लाने व स्वास्थ्य सुविधाओ के लिए 10-12 किलो मीटर दूर फरसियाँ,भोथली,सांकरा जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन से अतिशीघ्र पुल निर्माण की मांग किया है।

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