कलेक्टर और एसडीएम के आदेश की उड़ाई जा रही है धज्जियां
9 वर्ष पूर्व ब्लाक कालोनी नगरी के आवासीय क्वार्टर को डिस्मेंटल करने का आदेश.. आदेश का पालन नहीं
अगर दुर्घटनावश जन-धन की छति होती है तो कौन होगा जिम्मेदार..? बड़ा सवाल
उत्तम साहू, दबंग छत्तीसगढ़िया न्यूज
नगरी- आदिमजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत ब्लाक कालोनी स्थित 14 आवासीय क्वार्टर को नौ वर्ष पूर्व डिस्मेंटल करने का आदेश हो चुका है जिसका पालन आज तक नहीं हुआ है, इसके बावजूद आज भी कालोनी के इन सरकारी क्वार्टर में कर्मचारी अपने पूरे परिवार के साथ रह रहे हैं, मामले में संबंधित विभाग की घोर लापरवाही उजागर हो गया है,ऐसा लगता है कि संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं, अगर कोई दुर्घटना घटित होती है और जान माल की छति होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.? यह एक बड़ा सवाल है,
उल्लेखनीय है कि ब्लाक कालोनी नगरी में आदिमजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच छः दशक पूर्व में 14 आवासीय क्वार्टर का निर्माण किया गया था जो अति जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है, 2015 में धमतरी के तत्कालीन कलेक्टर भीम सिंह ने मौका मुआयना करने के बाद तत्काल उक्त जर्जर आवास को डिस्मेंटल कर उस जगह पर कार्यालय परियोजना प्रशासक एवं परियोजना स्टाफ के लिए आवास बनाए जाने के लिए प्रस्तावित किया था, किंतु 9 वर्ष बीतने के बाद भी इस आदेश पर अमल नहीं हुआ है,
गौरतलब है कि परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना नगरी जिला धमतरी का पत्र क्रमांक 355 दिनांक 2.12.2015 में उल्लेख है कि नगरी ब्लॉक मुख्यालय स्थित ब्लॉक कॉलोनी के आवासीय भवन अति जर्जर एवं खतरा युक्त हो गया है जिसे डिस्मेंटल की आवश्यकता है, पत्र के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी लोक निर्माण विभाग नगरी एवं हल्का पटवारी से प्रतिवेदन मंगाया गया, संयुक्त जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि उपरोक्त 14 आवासीय भवन अति जर्जर हो चुका है जिनका छप्पर छत दीवार काफी कमजोर हो गए हैं जिसे अतिशीघ्र डिस्मेंटल करने योग्य हैं उक्त शासकीय आवास बहुत पुराना एवं अति जर्जर होने से कभी भी आकस्मिक दुर्घटना की आशंका बनी रहती है तथा जनधन हानि होने की आशंका व्यक्त किया गया है, अतः शांति स्वरूप जन सुरक्षा तथा लोक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने से उक्त भवन को तोड़ना आवश्यक हो गया है जिस पर तत्कालीन एसडीएम संदीप कुमार अग्रवाल ने भवन को डिस्मेंटल करने का आदेश दिया था, डिस्मेंटल के बाद उक्त भूमि पर कार्यालय परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना नगरी के कार्यालय भवन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निवास के साथ ही कर्मचारियों के लिए 14 आवासीय भवन बनाए जाना प्रस्तावित किया गया था,
संबंधित विभाग के जिम्मेदार अफसरों पर हो कार्रवाई
विडंबना देखिए अधिकारी आदेश तो कर देते हैं लेकिन अपने कर्तव्यों से विमुख होकर जिम्मेदारी को भूल जाते हैं कि आदेश का पालन हुआ है कि नहीं, जब कोई दुर्घटना घटित होता है तब आनन-फानन में सफाई देने लग जाते है, ऐसे ही विगत दिनों शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आया है, विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा एक कमार बच्ची को अपने जान से हाथ धोना पड़ा है,
बता दें कि ब्लाक स्तर के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों से विमुख हो कर बेलगाम हो गये हैं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन और शासन को ऐसे गंभीर मामलों पर संज्ञान में लेकर संबंधित अधिकारियों पर सुशासन के चाबुक चलाते हुए कड़ी कार्रवाई करना चाहिए, तभी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करेंगे, अन्यथा बिना कार्यवाही के व्यवस्था में सुधार होने की संभावना नहीं है,


