स्कूल संचालक के द्वारा सिंचाई नाली के किनारे अवैध रुप से बनाया सड़क

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 स्कूल संचालक के द्वारा सिंचाई नाली के किनारे अवैध रुप से बनाया सड़क 

सिंचाई विभाग की खामोशी से मिलीभगत की आशंका 



उत्तम साहू 

नगरी/ सिंचाई विभाग के अधिकारी की मिलीभगत से शासन के नियमों का उलंघन करके खुलेआम अवैध कार्य करने का मामला सामने आया है।

दरअसल नगरी ब्लाक के बेलरगांव में प्राईवेट स्कूल का निर्माण किया जा रहा है यह निमार्ण मेन रोड से लगभग ढाई सौ मीटर की दूरी पर स्थित है, जहां पर यह निर्माण हो रहा है वहां तक आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है निर्माण स्थल तक पहुंचने के लिए सिर्फ केनाल रास्ता है। स्कूल निर्माण करने वाले व्यक्ति के द्वारा इसी नहर के पार में गिट्टी मुरूम डालकर अघोषित रूप से सड़क बना कर इसी रास्ते से चार पहिया वाहनों में ईंट सीमेंट रेत की ढुलाई हो रही है। यह एक गंभीर मामला है कि सिंचाई विभाग 250 मीटर सड़क निर्माण में एक निजी व्यक्ति को फायदा पहुंचा रहा है। 

               जांच की आवश्यकता

इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या वाकई में सड़क निर्माण में किसी निजी व्यक्ति को फायदा पहुंचाया जा रहा है, और यदि हां, तो इसके पीछे क्या कारण हैं। कोई भी निजी व्यक्ति अपनी मर्जी से नहर के किनारे सड़क नहीं बना सकता। ऐसा करना गैरकानूनी है और भूमि अतिक्रमण माना जाएगा। नहर और उसके किनारे की भूमि सरकार या संबंधित सिंचाई विभाग के नियंत्रण में होती है। 

नहर के किनारे सड़क बनाने से भूमि का अतिक्रमण होगा, जो कि एक कानूनी अपराध है।

सरकार या सिंचाई विभाग ऐसी स्थिति में कानूनी कार्यवाही कर सकता है, जिसमें सड़क को हटाना और अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाना भी शामिल हो सकता है। लेकिन विभाग के द्वारा ऐसा नहीं कर उक्त व्यक्ति को संरक्षण दिया जा रहा है। इस मामले पर सिंचाई विभाग के अधिकारी से फोन के माध्यम से संपर्क किया गया लेकिन अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

           अधिकारी आफिस में कभी नहीं मिलता 

नगरी ब्लाक के सांकरा जोन में पदस्थ सिंचाई विभाग के एसडीओ कभी आफिस जाता ही नही है फोन लगाओ तो हमेशा बाहर होने की बात करता है। इस अधिकारी का गृह जिला भी है और नौकरी के शुरवाती दिनों से ही आज तक यहां पदस्थ हैं।

 

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