सरकार की अनदेखी से आहत — अनियमित कर्मचारी फेडरेशन दिसंबर में करेगा विशाल प्रदर्शन
उत्तम साहू
रायपुर। छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने प्रदेश सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए दिसंबर माह में राज्य स्तरीय विशाल प्रदर्शन करने की घोषणा की है। फेडरेशन ने कहा कि वर्षों से शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय पाने वालों को न्यूनतम वेतन देने, तथा आउटसोर्सिंग सिस्टम समाप्त कर विभागीय समायोजन जैसी प्रमुख मांगों पर सरकार की चुप्पी अब असहनीय हो गई है।
फेडरेशन की हाल ही में संपन्न बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस पहल नहीं की, तो प्रदेशभर के हजारों अनियमित कर्मचारी राजधानी रायपुर में प्रदर्शन करेंगे।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के अनियमित कर्मचारी पिछले 5 से लेकर 30 वर्षों तक शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन “अनियमित” का ठप्पा अब भी उन पर लगा हुआ है। आर्थिक असुरक्षा, वेतन विसंगति और अस्थायी स्थिति के चलते इनकी हालत “मध्यकालीन बंधुआ मजदूरों” से भी बदतर बताई जा रही है।
फेडरेशन ने कहा कि चुनाव पूर्व भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके मंच से समर्थन व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया था कि सरकार बनने पर नियमितीकरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। इतना ही नहीं, “मोदी की गारंटी 2023 पत्र” में भी ‘वचनबद्ध सुशासन’ के अंतर्गत बिंदु क्रमांक 2 में अनियमित कर्मचारियों की समीक्षा हेतु कमेटी गठित करने का वादा किया गया था।
लेकिन, फेडरेशन के अनुसार, कमेटी गठन आदेश में अनियमित कर्मचारियों या उनके संगठनों का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिससे वादे और क्रियान्वयन में विरोधाभास स्पष्ट है।
फेडरेशन ने बताया कि मुख्यमंत्री एवं मंत्री परिषद के वरिष्ठ सदस्यों से कई दौर की मुलाकातें की गईं, लेकिन 17 माह बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। वहीं, कई विभागों के कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला और छंटनी की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं।
इसके साथ ही, संगठन ने न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 और संविदा नियम 2012 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण 2017 से और संविदा वेतन में वृद्धि अगस्त 2023 के बाद नहीं की गई है।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि सरकार उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है — “धरना स्थल शहर से दूर तुता में निर्धारित किया गया है, जबकि अन्य राजनीतिक व सामाजिक संगठनों को शहर में अनुमति दी जाती है।”
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
1️⃣ अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण/स्थायीकरण
2️⃣ निकाले गए कर्मचारियों की बहाली
3️⃣ न्यून मानदेय पाने वालों को न्यूनतम वेतन
4️⃣ अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जाए
5️⃣ आउटसोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता, समूह-समिति प्रणाली समाप्त कर विभागीय समायोजन
फेडरेशन ने कहा कि यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों पर पहल नहीं की, तो दिसंबर का प्रदर्शन निर्णायक आंदोलन में बदलेगा।

