नगरी..प्रशासन की ऐतिहासिक पहल: सिंचाई भूमि विवादों को सुलझाने की दिशा में एक ठोस कदम
नहर किनारे बन रहे विवादित भवनों के निर्माण डायवर्सन और एनओसी पर भी लगी रोक,
उत्तम साहू
नगरी क्षेत्र में दशकों से लंबित सिंचाई विभाग की भूमि दुरुस्तीकरण प्रक्रिया आखिरकार गति पकड़ चुकी है। जिलाधीश धमतरी अबिनाश मिश्रा की पहल और एसडीएम प्रीति दुर्गम के सख्त निर्देशन के साथ, यह वह कदम है जो वर्षों से उलझे मामलों में नई दिशा दे रहा है।
तीन दशक पहले नहर निर्माण के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित तो कर ली गई थी, लेकिन विभाग के नाम रिकॉर्ड दर्ज न होने से यह भूमि धीरे-धीरे विवाद और अव्यवस्था का कारण बन गई। प्रशासनिक स्तर पर यह न केवल लापरवाही का उदाहरण थी, बल्कि किसानों और नागरिकों के बीच असमंजस का भी विषय बनी रही।
प्रशासनिक सक्रियता और सामाजिक साझेदारी
इस बार का प्रयास अलग है — क्योंकि इस बार केवल दिशा नहीं, दृढ़ संकल्प भी नजर आ रहा है। एसडीएम एवं तहसील प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर नहर किनारे हो रहे अवैध निर्माणों पर रोक लगाई है। नगर पंचायत ने विवादित क्षेत्रों में एनओसी और डायवर्सन की प्रक्रिया रोक दी है। यह दिखाता है कि प्रशासन अब ‘पहले अनुमति, बाद में जांच’ वाली पुरानी प्रवृत्ति से हटकर ‘पहले जांच, फिर अनुमति’ की ओर बढ़ चुका है।
समाजसेवकों और पत्रकारों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। स्थानीय स्तर पर जिस सजगता और पारदर्शिता से उन्होंने भूमि विवादों को उठाया, उसने प्रशासनिक तंत्र को इन मामलों पर गंभीरता से काम करने के लिए प्रेरित किया।
संतुलन और पारदर्शिता की जरूरत
हालांकि, यह प्रक्रिया जितनी जरूरी है, उतनी ही संवेदनशील भी। विवादित भूमि से जुड़े प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता और न्यायिक दृष्टिकोण कायम रहना अनिवार्य है। यदि किसी स्थान पर असली लाभार्थी किसान या नागरिक हैं, तो उनकी बातों को भी सुनना होगा। प्रशासनिक सख्ती का उद्देश्य विकास को दिशा देना होना चाहिए, दमन का प्रतीक नहीं। यही नीति लंबे समय तक भरोसा कायम रखेगी।
जनहित के अनुरूप प्रशासनिक जागृति
युवा आदिवासी नेता गोलू मंडावी जैसे स्थानीय व्यक्तित्वों की सक्रियता बताती है कि जनता अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक सजग है। उनका कहना भी सही है कि जब जनता और प्रशासन समान ध्येय के साथ आगे बढ़ते हैं, तब वर्षों से लंबित मामले भी समाधान पा लेते हैं।
नगरी में हो रहे ये सुधार केवल भूमि दुरुस्तीकरण तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक उत्तरदायित्व की नई परिभाषा भी गढ़ रहे हैं। इस प्रयास से यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में सिंचाई परियोजनाएं सुचारू रूप से आगे बढ़ेंगी और नहर क्षेत्र का विकास फिर से प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

