ठेकेदार की लापरवाही से दो माह से ठप सड़क निर्माण; ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
देवपुर–सिहावा सहित कई मार्गों पर अधूरा निर्माण कार्य बना संकट..धूल, गिट्टी और गड्ढों से जनजीवन अस्त-व्यस्त
उत्तम साहू स्थानीय संवाददाता, नगरी
नगरी विकासखंड के देवपुर–सिहावा, सिहावा–बासपानी, घटुला–बोराई और बेलर–जैतपुरी मार्ग पर महीनों से अधूरा पड़ा सड़क निर्माण कार्य अब ग्रामीणों की परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। वर्ष 2025 में 13 किमी सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे, लेकिन कार्य की रफ्तार शुरुआत से ही सुस्त रही।
अगस्त–सितंबर में पुराने डामर को जेसीबी से उखाड़कर ठेकेदार ने कुछ स्थानों पर गिट्टी बिछाई, मगर दो माह से कार्य पूरी तरह बंद है। धूल, कंकड़ और गहरे गड्ढों ने सड़क को हादसों का अड्डा बना दिया है।
“शायद जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस सड़क से नहीं गुजरते!
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की दयनीय सड़क की हालत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता की देन है। धूल के गुबार से व्यापारियों की दुकानों से लेकर घरों तक का वातावरण असहनीय हो चुका है।
सरपंचों का फूटा गुस्सा..कार्रवाई की मांग
सरपंच आत्माराम, रामकुमार दयालु, भोजराम, टीकाराम, अनिल राय, प्रदान धुव, ठाकुरराम, सुरेंद्र यादव, संजय सोनवानी, आसकुमार, विमल डोमार साहू सहित कई ग्रामीणों ने कहा—
दो महीने से सड़क पर सिर्फ गिट्टी और धूल उड़ रही है
दुकानों में सब्जियां और सामान धूल से ढक रहा
पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा
राहगीरों को आंख, नाक और गले में जलन की शिकायत
दुर्घटनाएं बढ़ने लगी हैं
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द निर्माण कार्य शुरू न हुआ तो वे चक्का जाम करेंगे।
सबसे अधिक प्रभावित..सोनामगर–सिहावा सब्जी बाजार
यहां व्यापारियों की सब्जियों पर रोजाना धूल की परत चढ़ रही है। ग्राहक कम हो रहे हैं और स्वच्छता व्यवस्था चरमरा चुकी है।
अन्य मार्ग भी बदहाल
घटुला–बोराई मार्ग: सिर्फ मिट्टी डालकर मरम्मत की औपचारिकता
बेलर–जैतपुरी मार्ग: भुरसीडोंगरी में नाली की मरम्मत महीनों से अटकी, दुर्घटना का खतरा बढ़ा
नेत्र विशेषज्ञ की चेतावनी
नेत्र अधिकारी देवेंद्र कुमार साहू ने कहा कि सड़क पर उड़ती धूल से आंखों में संक्रमण और एलर्जी का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
विभाग ने माना..ठेकेदार कर रहा अनदेखी
एसडीओ प्रशांत कुमार साहू ने बताया कि “ठेकेदार को कई बार चेतावनी दी गई, पर वह अनसुना कर रहा है। अब उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।”
लोगों का सवाल— करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी अधूरा काम क्यों? निर्माण की सुस्त रफ्तार और अधूरा छोड़ा गया काम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
जब तक ठेकेदार पर सख्ती नहीं की जाएगी, ग्रामीणों की परेशानी और आक्रोश दोनों बढ़ते ही रहेंगे।



