सीएम साय के बयान के बाद..जमीन की गाइडलाइन दरों पर सरकार का बड़ा यू-टर्न केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने कई बढ़ी दरें वापस लीं,
रायपुर। जमीन की नई गाइडलाइन दरों को लेकर उठ रहे विरोध के बीच आखिरकार सरकार ने पीछे हटते हुए कई महत्वपूर्ण संशोधन कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर दरों पर पुनर्विचार होगा, और इसके 24 घंटे के भीतर ही केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने व्यापक बदलावों का ऐलान कर दिया। हाल ही में बढ़ाई गई कई दरें और प्रावधान अब वापस ले लिए गए हैं। साथ ही पूरे प्रदेश में मूल्यांकन की प्रक्रिया एकरूप करने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
🔹 इंक्रीमेंटल गणना का प्रावधान खत्म
नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्गमीटर तक के भूखंडों के लिए लागू की गई इंक्रीमेंटल दर की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब फिर से पुरानी स्लैब व्यवस्था ही लागू होगी—
- नगर निगम : 50 डिसिमल तक
- नगर पालिका : 37.5 डिसिमल तक
- नगर पंचायत : 25 डिसिमल तक
🔹 सुपर बिल्ट-अप पर मूल्यांकन समाप्त
बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट/दुकान/ऑफिस की कीमत अब सुपर बिल्ट-अप पर नहीं, बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर तय होगी। यह प्रावधान मध्यप्रदेश काल से लागू था, जिसे हटाने की लंबे समय से मांग उठ रही थी। इससे वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
🔹 ऊपरी मंजिलों पर मूल्यांकन में छूट
अब बहुमंजिला और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में—
- बेसमेंट व प्रथम तल : 10% छूट
- द्वितीय तल व उससे ऊपर : 20% छूट
इससे मध्यम वर्ग के लिए फ्लैटों की कीमत में राहत मिलेगी।
🔹 कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की दूरी आधारित छूट
मुख्य मार्ग से 20 मीटर दूर स्थित कमर्शियल संपत्तियों के मूल्यांकन में 25% कमी लागू होगी।
🔹 जिला मूल्यांकन समितियों को नए निर्देश
जिले में बढ़ी दरों पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा कर 31 दिसंबर तक संशोधित प्रस्ताव केंद्रीय बोर्ड को भेजने होंगे। इन प्रस्तावों के आधार पर नई गाइडलाइन दरें तय होंगी।
सरकार के ये सभी निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रदेश में जमीन और निर्माण गतिविधियों पर इन बदलावों का व्यापक असर दिखाई देने की संभावना है।

