जनविश्वास की कसौटी पर साय सरकार के दो वर्ष क्या छत्तीसगढ़ विकास के नए पथ पर अग्रसर हुआ है.?
संपादक उत्तम साहू दबंग छत्तीसगढ़िया न्यूज
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दो वर्ष पूरे होना केवल एक प्रशासनिक पड़ाव नहीं है, बल्कि यह उस जनादेश की समीक्षा का अवसर भी है, जो जनता ने परिवर्तन की उम्मीद के साथ दिया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपने कार्यकाल की दूसरी वर्षगांठ पर जिस प्रकार उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है, वह राज्य की विकास यात्रा की दिशा और गति को समझने का आधार प्रदान करता है।
सरकार के गठन के तुरंत बाद 18 लाख से अधिक परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृति देना इस बात का संकेत था कि नई सरकार की प्राथमिकताओं में गरीब और वंचित तबका सबसे ऊपर है। आवास केवल एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक होता है। इसी तरह किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा ने यह स्पष्ट किया कि कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने का प्रयास गंभीरता से किया गया है।
महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में महतारी वंदन योजना सरकार की सबसे चर्चित और प्रभावशाली पहल बनकर सामने आई है। लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता न केवल आर्थिक संबल प्रदान करती है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को भी मजबूत करती है। यह योजना सामाजिक बदलाव के बीज बोने वाली कही जा सकती है, बशर्ते इसका क्रियान्वयन दीर्घकाल तक पारदर्शी और नियमित बना रहे।
युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उभरा है। पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपना, वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करना और आयु सीमा में छूट देना उस अविश्वास को कम करने की दिशा में कदम हैं, जो पिछले वर्षों में प्रतियोगी युवाओं के मन में घर कर गया था। हालांकि, इन प्रयासों की वास्तविक सफलता रोजगार सृजन की गति और नियुक्तियों की समयबद्धता से ही आंकी जाएगी।
वनवासी और जनजातीय समाज के लिए तेंदूपत्ता पारिश्रमिक में वृद्धि और चरणपादुका योजना की पुनः शुरुआत सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे बढ़ाती है। इसके साथ ही मुफ्त राशन जैसी योजनाएं यह दर्शाती हैं कि सरकार कल्याणकारी राज्य की भूमिका से पीछे नहीं हटी है।
माओवाद के खिलाफ सरकार की नीति दोहरे दृष्टिकोण—सुरक्षा और विकास—पर आधारित दिखाई देती है। एक ओर नक्सलियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। स्कूलों का पुनः खुलना और सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार इस बात का संकेत है कि बस्तर को केवल सुरक्षा के चश्मे से नहीं, बल्कि समग्र विकास के नजरिए से देखा जा रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के क्षेत्र में किए गए सुधार प्रशासनिक दक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ई-ऑफिस, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल और विभागीय सुधारों ने शासन को अधिक जवाबदेह बनाने का प्रयास किया है। लेकिन यह भी आवश्यक है कि इन तकनीकी सुधारों का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
आर्थिक मोर्चे पर नई औद्योगिक नीति, निवेश प्रस्तावों की बड़ी संख्या और जीएसटी संग्रह में वृद्धि यह संकेत देती है कि राज्य निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अधोसंरचना विकास—चाहे वह रेल परियोजनाएं हों, एक्सप्रेस-वे हों या एयर कनेक्टिविटी—छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक और लॉजिस्टिक मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला सकता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए प्रयास—युक्तियुक्तकरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और हिंदी में एमबीबीएस की शुरुआत—दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास की नींव रख सकते हैं। हालांकि, गुणवत्ता और समान पहुंच सुनिश्चित करना आने वाली सबसे बड़ी चुनौती होगी।
सरकार द्वारा 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य निर्धारित करना दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। बिजली, पानी, आवास और शहरी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं आम नागरिक के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं और यही किसी भी सरकार की सफलता की असली कसौटी होती हैं।
कुल मिलाकर, साय सरकार के दो वर्ष यह संकेत देते हैं कि प्रशासन ने गति, निर्णय और दिशा—तीनों को साधने का प्रयास किया है। अब चुनौती यह है कि इन योजनाओं और नीतियों का प्रभाव जमीन पर समान रूप से दिखे, क्षेत्रीय असमानताएं कम हों और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि यह कार्यकाल केवल उपलब्धियों की सूची बनकर रह जाएगा या वास्तव में छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

