पत्रकार की हत्या की साजिश में तहसीलदार समेत कई पर FIR, सत्ता–माफिया गठजोड़ उजागर
सूरजपुर/ जिले में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला सामने आया है। भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकार की हत्या की सुपारी देने के आरोप में लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा समेत कई लोगों के खिलाफ प्रतापपुर थाना में FIR दर्ज की गई है। मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार, भूमाफिया नेटवर्क और पत्रकारों को दबाने की कथित साजिश की ओर इशारा करता है।
आरोप है कि बिना कलेक्टर की अनुमति और नियमों को दरकिनार कर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई गई। इन अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद SDM सूरजपुर द्वारा तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन चार महीने बीतने के बावजूद जांच रिपोर्ट लंबित है।
भूमाफिया–तहसीलदार गठजोड़ के आरोप
जांच में ग्राम हरिपुर निवासी संजय गुप्ता और उसके पुत्र हरिओम गुप्ता की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि तहसीलदार से मिलीभगत कर गैरकानूनी नामांतरण कराया गया और खुलासे के बाद पत्रकारों को धमकाया गया। एक अन्य मामले में देवानंद कुशवाहा की दो एकड़ जमीन कथित रूप से रिश्वत लेकर बैकडेट में उसके भाई के नाम किए जाने की भी शिकायत है।
डेढ़ लाख में हत्या की सुपारी
पुलिस के अनुसार पत्रकार प्रशांत पाण्डेय की हत्या के लिए डेढ़ लाख रुपये की सुपारी दी गई। आरोपियों में तहसीलदार पैंकरा, संजय व हरिओम गुप्ता, प्रेमचंद ठाकुर, अविनाश ठाकुर, संदीप कुशवाहा, तथाकथित पत्रकार फिरोज अंसारी और उसका साला असलम शामिल बताए गए हैं। हत्या के तीन प्रयास किए गए, जो संयोगवश विफल रहे।
ग्रामसभा में खुला राज
हरिपुर ग्रामसभा के दौरान आरोपियों के बीच विवाद के बाद साजिश सार्वजनिक हो गई। आरोप है कि संजय गुप्ता ने भरी पंचायत में धमकी और सुपारी देने की बात स्वीकार कर माफी मांगी, जबकि हरिओम गुप्ता ने इससे इनकार किया।
FIR और आगे की कार्रवाई
प्रतापपुर थाना में सभी नामजद आरोपियों पर अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच तेज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच पर सवाल
गंभीर आरोप, दस्तावेजी सबूत और FIR के बावजूद SDM स्तर की जांच चार महीने से लंबित है। इससे प्रशासनिक लापरवाही या संरक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब मामले का अगला पड़ाव अदालत माना जा रहा है—जहां कानून के सामने पद की गरमी नहीं चलती।

