वन भैंसा संरक्षण में गांव बने भागीदार, उदंती-सीतानदी में नई मिसाल
गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन भैंसा संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। रिज़र्व से सटे 17 गांवों के ग्रामीणों ने राज्य पशु वन भैंसा के संरक्षण और पुनर्वास के लिए खुलकर सहयोग देने का ऐलान किया है।
1 जनवरी 2026 को जारी प्रेस नोट के मुताबिक, ग्रामीण समुदायों ने वन विभाग के साथ मिलकर मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने, जैव विविधता की रक्षा करने और संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा जताया है। ग्रामीणों का मानना है कि वन भैंसा न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत की पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत अहम प्रजाति है।
वन विभाग ने बताया कि संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षित आवास, नियमित निगरानी, आजीविका सहयोग और समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल को अपनाया जा रहा है। साथ ही नानकशाही/सेंट्रल इंडियन लैंडस्केप के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय और पुनर्वास योजनाओं पर भी काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि योजनाएं पारदर्शिता और विश्वास के साथ लागू की जाएं, तो वे वन भैंसा संरक्षण में हरसंभव सहयोग करेंगे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी से न सिर्फ वन भैंसा, बल्कि पूरे उदंती-सीतानदी क्षेत्र की जैव विविधता को दीर्घकालीन सुरक्षा मिल सकेगी।

