ग्रामीण प्रतिभाओं का उत्सव बना कुम्हडा का संकुल स्तरीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक महोत्सव
खेल बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं.. अंबिका मरकाम
उत्तम साहू
नगरी/ ग्राम कुम्हाडा में आयोजित तीन दिवसीय संकुल स्तरीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण अंचल में प्रतिभा, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना की कोई कमी नहीं है। खेल मैदान से लेकर सांस्कृतिक मंच तक, हर गतिविधि में उत्साह, अनुशासन और सहभागिता की जीवंत झलक देखने को मिली।
इस आयोजन का मूल उद्देश्य केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में खेल भावना, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच का विकास रहा। संकुल अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामों से आए विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी ने कार्यक्रम को जन-आंदोलन का स्वरूप दे दिया।
कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, रस्साकशी जैसी खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने दमखम और टीमवर्क का शानदार प्रदर्शन किया। वहीं लोकनृत्य, देशभक्ति गीत, समूह एवं एकल नृत्य जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ग्रामीण संस्कृति की समृद्ध विरासत को मंच पर सजीव कर दिया।
कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी संकुल स्त्री खेलकूद प्रतियोगिता, जिसमें छात्राओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि सिहावा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि खेल बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलों में संतुलन, नियमित अभ्यास, नशे और मोबाइल की लत से दूरी तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने पर बल दिया। बालिकाओं और महिलाओं की सहभागिता की सराहना करते हुए उन्होंने भविष्य में ऐसे आयोजनों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुरेल के अध्यक्ष अखिलेश दुबे, ग्राम कुम्हाडा के सरपंच गोकुल नेताम, माकरदोना के सरपंच सहदेव मरकाम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षक, युवा साथी और ग्रामवासी उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर विजेता एवं उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न यह आयोजन ग्राम पंचायत कुम्हाडा और आयोजन समिति के सामूहिक प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण बना।
कुम्हडा का यह आयोजन संदेश दे गया कि जब मंच मिलता है, तो गांव की प्रतिभा भी शिखर छूने का माद्दा रखती है।

