कर्णेश्वर मेला में उमड़ा आस्था का सैलाब, देव मड़ई में गूंजा परंपरा और संस्कृति का रंग
उत्तम साहू
नगरी। ऐतिहासिक कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर में माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित वार्षिक मेला महोत्सव सोमवार को पूरे श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान आयोजित देव मड़ई कार्यक्रम में आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
मेला महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों के साथ-साथ सीमावर्ती राज्य ओडिशा, बस्तर और दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों आंगा देव एवं देवी-देवता अपने पूरे पारंपरिक स्वरूप में डांग, डोली, बाना और वाद्ययंत्रों के साथ कर्णेश्वर धाम पहुंचे। देवी-देवताओं ने खम्बेश्वरी माता में जोहार भेंट कर परंपरागत रूप से मेला क्षेत्र की ढाई परिक्रमा की, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
कर्णेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा देवी-देवताओं का पारंपरिक सम्मान किया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता, वरिष्ठ ट्रस्टी प्रकाश बैस, संरक्षक कैलास पवार, उपाध्यक्ष रवि ठाकुर, रवि दुबे, सचिव भरत निर्मलकर, कोषाध्यक्ष निकेश ठाकुर, सह सचिव मोहन पुजारी सहित ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने फूल-मालाएं पहनाकर एवं नारियल भेंट कर देवी-देवताओं का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने कर्णेश्वर महादेव मंदिर में लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान शिव के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालु विभिन्न साधनों और वाहनों से मेला स्थल पहुंचे।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। वहीं स्काउट-गाइड के छात्र-छात्राओं ने मंदिर परिसर एवं भोजन शाला में सेवा कार्य कर अनुकरणीय योगदान दिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए चिकित्सा शिविर में प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध रही। नगर पंचायत नगरी द्वारा टैंकरों से पेयजल व्यवस्था की गई तथा सफाई कर्मियों ने दिनभर साफ-सफाई का जिम्मा संभाले रखा।
मेले में दिखी रौनक और व्यापारिक उत्साह
मेले में लगे क्राफ्ट बाजार, मीना बाजार, मौत का कुआं, झूले और अन्य मनोरंजन साधनों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की, जिससे दुकानदारों के चेहरों पर भी राहत और खुशी नजर आई।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा
रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘रंग झरोखा नाइट’ का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खूब सराहा।
इस अवसर पर सिहावा विधायक अंबिका मरकाम, पूर्व विधायक श्रवण मरकाम, पूर्व विधायक पिंकी शिवराज शाह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और मेले की भव्यता के साक्षी बने।
कुल मिलाकर कर्णेश्वर मेला महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यह आयोजन केवल मेला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का महापर्व है, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है।

