पाँच साल बाद भी न्याय अधूरा: गंगरेल डूबान पीड़ितों का विधानसभा मार्च, सरकार को खुली चुनौती
डूबान पीड़ितों का पैदल मार्च, 27 फरवरी को विधानसभा घेराव का ऐलान
उत्तम साहू
धमतरी। विकास की कीमत चुकाने वाले गंगरेल बाँध के डूबान प्रभावित परिवारों का सब्र अब जवाब दे चुका है। ज़मीन, घर और रोज़ी-रोटी गंवाने के बाद भी पुनर्वास के नाम पर उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन मिला है—न ज़मीन मिली, न न्याय।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पात्र प्रभावितों को समानता के आधार पर भूमि आवंटन आज तक पूरा नहीं हो सका। आदेश को पाँच वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि पुनर्वास कागज़ों से बाहर नहीं निकलता, तो यह केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल है।
23 फरवरी 2026 से गांधी मैदान, धमतरी में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना अब प्रतीकात्मक विरोध नहीं रहा—यह अधिकार और अस्तित्व की सीधी लड़ाई बन चुका है। जिन परिवारों को आरक्षित भूमि पर बसाया जाना था, वे आज भी भूमिहीन भटक रहे हैं। सवाल वही है—भूमि है, आदेश है, फिर न्याय क्यों नहीं?
इसी आक्रोश के साथ डूबान प्रभावितों ने बड़ा फैसला लिया है। 25 फरवरी से धमतरी से नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पैदल मार्च शुरू होगा, जो 27 फरवरी को विधानसभा घेराव में बदलेगा। यह सिर्फ पैदल यात्रा नहीं, बल्कि वर्षों के इंतज़ार और उपेक्षा के खिलाफ सीधी चेतावनी मानी जा रही है।
डूबान संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि आंदोलन अहिंसात्मक, अनुशासित और संवैधानिक रहेगा, लेकिन अब मौन नहीं रहेगा। समिति ने प्रशासन से अनुमति मांगी है और चेतावनी दी है कि मांगों के समाधान तक गांधी मैदान का धरना जारी रहेगा।
अब निगाहें शासन पर हैं—
क्या न्याय फिर फाइलों में दबा रहेगा, या ज़मीन पर उतरकर पीड़ितों को उनका हक मिलेगा?

