भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिला आर्थिक संबल, धमतरी जिले में 23 हजार से अधिक हितग्राहियों के खातों में पहुँची 23 करोड़ से अधिक राशि

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भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिला आर्थिक संबल, धमतरी जिले में 23 हजार से अधिक हितग्राहियों के खातों में पहुँची 23 करोड़ से अधिक राशि


उत्तम साहू 

धमतरी, 25 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत आज राज्यभर के लाखों भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को बड़ी राहत मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से लगभग 5 लाख परिवारों के खातों में 500 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जारी की।

इस योजना के अंतर्गत धमतरी जिले के 23,107 पात्र भूमिहीन कृषि मजदूरों के बैंक खातों में कुल 23 करोड़ 10 लाख 70 हजार रुपये की राशि अंतरित की गई। प्रत्येक हितग्राही को 10,000 रुपये की वार्षिक सहायता सीधे उनके खातों में भेजी गई, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और स्थायित्व मिल सके।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम बलौदाबाजार के पंडित चक्रपाणि शुक्ल हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान में आयोजित हुआ, जहां से मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभिन्न जिलों के हितग्राहियों से संवाद कर योजना के प्रभाव और लाभ की जानकारी ली।

धमतरी जिले में भी जिला मुख्यालय सहित कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के जनपद सभागार में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, जनपद अध्यक्ष महेश गोटा उपाध्यक्ष हृदय साहू नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा, उपस्थित रहे, वहीं जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक ओंकार साहू वर्चुअल रूप से जुड़े और हितग्राहियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष अंगीरा ध्रुव, उपाध्यक्ष केशव साहू, पार्षद संतोष सोनकर और रुखमणी सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम में अपर कलेक्टर इंदिरा नवीन सिंह देवहारी, एसडीएम पियुष तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने कलेक्टर के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया, वहीं तहसील और नगरीय निकाय स्तर पर भी आयोजन संपन्न हुए।

उल्लेखनीय है कि यह योजना छत्तीसगढ़ शासन की एक अहम पहल है, जिसका उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। नियमित आर्थिक सहायता से न केवल हितग्राहियों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

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