नगरी-सिहावा में फूटा किसानों और भाजपाइयों का गुस्सा,पूर्व सीएम के'अफीम' वाले बयान पर सियासत में 'उबाल'
भूपेश बघेल को चुनौती: सबूत दिखाओ,या सार्वजनिक रूप से माफी माँगों
उत्तम साहू
नगरी (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के एक कथित बयान ने प्रदेश की सियासत में 'अफीम' सा नशा घोल दिया है, लेकिन यह नशा उल्लास का नहीं, बल्कि आक्रोश का है. नगरी-सिहावा क्षेत्र उस समय 'रणक्षेत्र' में तब्दील हो गया जब क्षेत्र में अफीम की खेती होने के श्री बघेल के कथित दावे ने स्थानीय किसानों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के गुस्से को चरम पर पहुँचा दिया.
बजरंग चौक पर प्रदर्शन, दागे गए तीखे सवाल
25 मार्च की तारीख नगरी-सिहावा के इतिहास में दर्ज हो गई. बजरंग चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं का एक विशाल रेला उमड़ पड़ा. ढोल-नगाड़ों की जगह इस बार नारों की गूंज थी. प्रदर्शनकारी पूरी तरह से आक्रामक मुद्रा में थे. उनका एक ही स्वर था कि "अफीम खेती का आरोप न सिर्फ सफेद झूठ है, बल्कि यह क्षेत्र के मेहनतकश किसानों की पाक-साफ छवि पर एक गहरा आघात है."
चुनौती: 'या तो सबूत दिखाओ, या सार्वजनिक रूप से माफी माँगो'
गुस्से से उबलते कार्यकर्ताओं ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पुतले का दहन किया. जलता हुआ पुतला उनके आक्रोश की गवाही दे रहा था. उन्होंने श्री बघेल के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की. साथ ही, उन्होंने एक सीधी और तीखी चुनौती भी दे डाली. कार्यकर्ताओं ने कहा, "अगर आपके पास इस आरोप के समर्थन में रत्ती भर भी सबूत है, तो उसे तत्काल सार्वजनिक करें. अन्यथा, किसानों से, उनकी गरिमा से खिलवाड़ करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगें."
अनहोनी टली: पुतला दहन के बीच हादसा
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और भी तनावपूर्ण और भयावह हो गया, जब पुतला दहन की प्रक्रिया के बीच एक युवा कार्यकर्ता के कपड़ों में अचानक आग लग गई. आग की लपटें देखते ही भगदड़ मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. लेकिन, मौके पर मौजूद लोगों की सूझबूझ और सतर्कता ने एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया. उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए आग को बुझाया, जिससे कार्यकर्ता को बड़ी क्षति नहीं पहुँची.
चेतावनी: 'नहीं मांगी माफी, तो आंदोलन होगा और उग्र'
प्रदर्शनकारियों ने साफ़ और दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस बयान पर जल्द माफी नहीं मांगी गई, तो यह आंदोलन केवल यहीं नहीं रुकेगा. उन्होंने कहा, "किसानों की प्रतिष्ठा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा. यदि बघेल अपनी बात पर अड़े रहते हैं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से उनकी होगी."
सियासी गरमाहट: बघेल के 'रुख' पर टिकी निगाहें
फ़िलहाल, इस कथित बयान ने पूरे छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस और भाजपा के बीच 'अफीम युद्ध' छिड़ गया है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस गहरे होते विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं - क्या वह अपने बयान पर बने रहेंगे, कोई नया मोड़ देंगे, या फिर सार्वजनिक माफी मांगकर इस सियासी आग को शांत करेंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमाई रहेगी।
भाजपा के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नगरी सिहावा क्षेत्र के हजारों किसान सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

