धमतरी: 75 एकड़ राजस्व भूमि पर कब्जे और पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने डिप्टी रेंजर पर लगाए गंभीर आरोप

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धमतरी: 75 एकड़ राजस्व भूमि पर कब्जे और पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने डिप्टी रेंजर पर लगाए गंभीर आरोप



उत्तम साहू 

धमतरी। जिले के मगरलोड तहसील अंतर्गत ग्राम सोनपैरी में 75 एकड़ राजस्व भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सैकड़ों ग्रामीणों ने जनदर्शन में पहुंचकर वन परिक्षेत्र मोहंदी के डिप्टी रेंजर मुकुंद राव वाहने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए अवैध कब्जे, पेड़ों की कटाई और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?

ग्राम विकास समिति सोनपैरी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, ग्राम के ‘गंजीमार’ क्षेत्र की लगभग 75 एकड़ भूमि,जिसमें घास एवं आबादी उपयोग की जमीन शामिल है,राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भूमि पर डिप्टी रेंजर द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए बिना अनुमति कार्य किए जा रहे हैं।

    ग्रामीणों के प्रमुख आरोप

बिना अनुमति निर्माण कार्य: ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति के सड़क निर्माण और मुरूम खनन कराया गया।आरोप है कि लगभग 1000 पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया, जिससे पर्यावरण और ग्रामीणों की आजीविका दोनों प्रभावित हुई हैं।

  • अवैध खुदाई: भूमि के चारों ओर करीब 5 फीट गहरी और चौड़ी खाई खोद दी गई है, जिससे आवागमन और उपयोग में बाधा उत्पन्न हो रही है।
  • प्रताड़ना का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपनी भूमि बचाने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें वन भूमि का हवाला देकर डराया और रोका जाता है।

ग्रामीणों की मांग

ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष दादूराम, उपाध्यक्ष द्वारका राम साहू पूर्व सरपंच गोविंद साहू सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने हस्ताक्षरित आवेदन में प्रशासन से मांग की है कि:

  • पूरे मामले की निष्पक्ष और तत्काल जांच कराई जाए।
  • जांच पूरी होने तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाए।
  • दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

विभाग का पक्ष

वहीं वन परिक्षेत्र अधिकारी पंचराम साहू ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि का एक हिस्सा (करीब 20–25 एकड़) एक किसान की निजी लगानी भूमि है, जिसके पेड़ों की कटाई के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुरूम उत्खनन नहीं, बल्कि किसान द्वारा अपने खेत तक पहुंच के लिए मिट्टी डालकर रास्ता बनाया गया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीण खाली पड़ी जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास कर रहे थे, जिसे वन विभाग ने रोका है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

(समाचार विश्लेषण)

यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, वन विभाग और ग्रामीणों के बीच भरोसे की कमी को भी उजागर करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पर्यावरण और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो गलत जानकारी फैलाने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी होगी।

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